नीमच में आदिवासी संस्कृति का भव्य प्रदर्शन, ‘जय जोहार’ के नारों से गूंजा शहर

 प्रभु सिंह बैंस | नीमच

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नीमच शहर में रविवार को आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का अनूठा नजारा देखने को मिला। सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में शबरी आश्रम से विशाल रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों, महिलाओं और समाजजनों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया।



रैली में युवाओं के हाथों में प्रतीकात्मक तीर-कमान नजर आए, जबकि पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और लोकगीतों ने माहौल को पूरी तरह आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। रैली के दौरान ‘जय जोहार’ तथा ‘जय जोहार का नारा है, भारत देश हमारा है’ जैसे नारों से शहर के प्रमुख मार्ग गूंजते रहे।

रैली शबरी आश्रम से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुरानी कृषि उपज मंडी पहुंची। यहां रैली का समापन आमसभा, सम्मान समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ।

पारंपरिक वेशभूषा में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक

विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। रैली में युवक-युवतियां और महिलाएं पारंपरिक परिधानों में शामिल हुईं। युवाओं ने हाथों में प्रतीकात्मक तीर-कमान लेकर अपनी पारंपरिक पहचान का प्रदर्शन किया।

पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर समाजजन उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। महिलाओं और युवतियों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने रैली को और आकर्षक बना दिया।


 


लोकगीत और नृत्य ने बढ़ाया आयोजन का उत्साह

रैली के दौरान पारंपरिक आदिवासी लोकगीत और संगीत की प्रस्तुतियां भी हुईं। संगीत की धुन पर समाजजनों ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया।

रैली जिन प्रमुख मार्गों से गुजरी, वहां शहरवासियों ने आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को उत्सुकता के साथ देखा। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।

शबरी आश्रम से शुरू हुई विशाल रैली

सर्व आदिवासी समाज के लोग सुबह शबरी आश्रम पर एकत्रित हुए। इसके बाद रैली के रूप में सभी शहर की ओर रवाना हुए। रैली शोरूम चौराहा, फव्वारा चौक सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।

पूरे मार्ग में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक जय जोहार के नारे लगाए। रैली में युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ निकली रैली ने शहर में आदिवासी संस्कृति की अलग पहचान प्रस्तुत की।

 

पुरानी कृषि उपज मंडी में हुई आमसभा

रैली के पुरानी कृषि उपज मंडी पहुंचने के बाद यहां आमसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों और अतिथियों ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, अधिकारों और एकता को लेकर भी अपने विचार रखे। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों का सम्मान किया गया।

आमसभा के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिसमें समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश

आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज ने अपनी गौरवशाली संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार विश्व आदिवासी दिवस केवल सांस्कृतिक उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि समाज की पहचान, अधिकारों, परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण दिन भी है।

नीमच में आयोजित विशाल रैली में बड़ी संख्या में समाजजनों की सहभागिता ने सामाजिक एकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव की भावना को प्रदर्शित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, संगीत और जय जोहार के नारों ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

Comments

Popular posts from this blog

महाशिवरात्रि पर्व 2026: आस्था, साधना, विज्ञान और सामाजिक समरसता का महापर्व

UGC Act 2026: उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय या नया असंतुलन?

संत रविदास : समता, श्रम और मानव गरिमा के अमर साधक