किसान या अन्नदाता? मेहनत किसान की, मुनाफा दूसरों का, आखिर कब मिलेगा किसान को पूरा हक?
किसान कहे जाएं या अन्नदाता? लेख | लेखक: रघुवीर सिंह पंवार भारत में किसान को अन्नदाता कहा जाता है। किसान खेत में मेहनत करके अनाज, सब्जियां, फल और दूसरी कृषि उपज पैदा करता है। उसकी मेहनत से देश की करोड़ों थालियां भरती हैं। लेकिन सवाल यह है कि जिसे हम सम्मान से अन्नदाता किसान कहते हैं, क्या उसे उसकी मेहनत का पूरा मूल्य और सम्मान मिल रहा है? कड़कड़ाती ठंड हो, झुलसाती गर्मी हो या मूसलाधार बारिश— किसान हर मौसम में खेत में डटा रहता है। उसके पसीने से पैदा हुआ अन्न बाजार तक पहुंचता है और फिर करोड़ों लोगों के घरों की रसोई तक जाता है। इसके बावजूद किसान की आर्थिक स्थिति आज भी चिंता का विषय बनी हुई है। किसान की मेहनत, लेकिन मुनाफा किसके हिस्से में? किसान फसल तैयार करने के लिए महीनों मेहनत करता है। बीज, खाद, दवाई, सिंचाई, बिजली, मजदूरी और खेती की मशीनरी पर पैसा खर्च करता है। कई बार खेती के लिए उसे कर्ज भी लेना पड़ता है। फसल तैयार होने तक किसान को यह चिंता रहती है कि मौसम उसका साथ देगा या नहीं। कभी कम बारिश, कभी अतिवृष्टि, कभी ओलावृष्टि और कभी कीटों का प्रकोप उसकी पूरी मेहनत पर पानी फ...