डॉ. भीमराव आंबेडकर: सामाजिक न्याय के महान शिल्पकार
भारत के इतिहास में कुछ ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने न केवल अपने समय को दिशा दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक नई राह बनाई। भीमराव आंबेडकर ऐसे ही एक महान व्यक्तित्व थे, जिन्हें हम प्रेम और सम्मान से “बाबा साहेब” के नाम से जानते हैं। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और मानवाधिकारों के सच्चे प्रहरी थे। डॉ. भीमराव आंबेडकर: 🔶 प्रस्तावना डॉ. आंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय और भेदभाव के विरुद्ध एक सतत संघर्ष की गाथा है। उन्होंने उस समाज में जन्म लिया, जहाँ जाति के आधार पर मनुष्यों को अपमानित किया जाता था। लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा, बुद्धिमत्ता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर न केवल अपने लिए, बल्कि करोड़ों वंचित लोगों के लिए सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी। 🔶 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू (अब डॉ. आंबेडकर नगर) में हुआ था। उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल सेना में सूबेदार थे। बाल्यकाल से ही उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना ...