जलवायु परिवर्तन के बीच उज्जैन के किसान ने दिखाई नई राह, रेज्ड बेड तकनीक से 25 एकड़ में की सोयाबीन की बुवाई

 उज्जैन | 2 जुलाई। बदलते मौसम और अनिश्चित बारिश के दौर में उज्जैन जिले के एक किसान ने आधुनिक खेती की ऐसी तकनीक अपनाई है, जो कम और अधिक दोनों तरह की बारिश में फसल को सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो रही है। घट्टिया तहसील के ग्राम पिप्लियाहामा के प्रगतिशील किसान अश्विनी सिंह चौहान ने इस वर्ष रेज्ड बेड (मेढ़ एवं नाली) तकनीक से करीब 25 एकड़ क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई कर जिले के किसानों के सामने नई मिसाल पेश की है।



बदलते मौसम को देखते हुए लिया नया फैसला

श्री आशापूर्णा कृषि फार्म के संचालक अश्विनी सिंह चौहान ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से कभी कम बारिश तो कभी अत्यधिक वर्षा के कारण खेती प्रभावित हो रही थी। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की सलाह पर उन्होंने मेढ़ एवं नाली पद्धति वाली विशेष सीड ड्रिल खरीदी और इसी तकनीक से इस बार सोयाबीन की बुवाई शुरू की।

उनका कहना है कि यह तकनीक बदलते मौसम के अनुरूप खेती को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बना रही है।


 


कम और ज्यादा बारिश, दोनों में फसल को फायदा

रेज्ड बेड तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम वर्षा होने पर मेढ़ों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे फसल को पर्याप्त नमी मिलती रहती है। वहीं, अधिक बारिश होने पर अतिरिक्त पानी नालियों के माध्यम से आसानी से बाहर निकल जाता है। इससे खेत में जलभराव नहीं होता और पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता।

उत्पादन लागत कम, पैदावार बेहतर

इस तकनीक में पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे उन्हें पर्याप्त धूप और हवा मिलती है। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और फसल स्वस्थ रहती है। साथ ही कीट एवं रोगों का प्रकोप भी कम होता है।

रेज्ड बेड तकनीक अपनाने से बीज और उर्वरक की खपत कम होती है, उत्पादन लागत घटती है और किसानों की आय बढ़ने की संभावना रहती है।

जलभराव की समस्या से मिली राहत

अश्विनी सिंह चौहान ने बताया कि पहले हर वर्ष अधिक बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाता था, जिससे फसल खराब होने पर बीमा दावों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन इस बार नई तकनीक अपनाने के बाद ऐसी स्थिति नहीं बनी। उन्होंने यह भी बताया कि यह सीड ड्रिल नरवाई वाले खेतों में भी प्रभावी ढंग से काम करती है।


 


अन्य किसानों से की नई तकनीक अपनाने की अपील

प्रगतिशील किसान अश्विनी सिंह चौहान ने जिले के अन्य किसानों से भी रेज्ड बेड तकनीक अपनाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि किसान पहले छोटे क्षेत्र में इसका प्रयोग करें और परिणाम देखने के बाद बड़े स्तर पर इसे अपनाएं। उनका विश्वास है कि यह तकनीक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच खेती को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बना सकती है।

जलवायु-अनुकूल खेती की दिशा में सकारात्मक पहल

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रेज्ड बेड तकनीक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने वाली आधुनिक खेती की प्रभावी पद्धतियों में शामिल है। इससे पानी का बेहतर प्रबंधन, मिट्टी का संरक्षण और उत्पादन क्षमता में सुधार संभव है। उज्जैन जिले में इस तकनीक का सफल उपयोग अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।

यह भी पडे  :- 

उज्जैन में हरियाली का महाअभियान शुरू, जुलाई में लगाए जाएंगे 21 हजार पौधे; जनपद पंचायत ने शुरू किया वृहद पौधारोपण अभियान



 




Comments

Popular posts from this blog

महाशिवरात्रि पर्व 2026: आस्था, साधना, विज्ञान और सामाजिक समरसता का महापर्व

UGC Act 2026: उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय या नया असंतुलन?

संत रविदास : समता, श्रम और मानव गरिमा के अमर साधक