धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने मांगा समय, जेपी नड्डा से 2 घंटे चली बैठक, कल फिर होगी वार्ता
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और NEET पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलनकारी संगठन और केंद्र सरकार के बीच सोमवार को लगभग दो घंटे तक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद आंदोलनकारी संगठन सीजेपी ने दावा किया कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा है।
दिल्ली स्थित विठ्ठल भाई पटेल हाउस में हुई इस बैठक में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि आंदोलनकारियों की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने प्रतिनिधित्व किया।
सीजेपी ने सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
बैठक के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि संगठन ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा।
- आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए युवाओं के खिलाफ कार्रवाई रोकने और उन्हें रिहा करने की मांग।
सौरव दास ने कहा कि सरकार ने इन मांगों पर जवाब देने के लिए अगले दिन दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो देशभर में चल रहे प्रदर्शन और अधिक व्यापक किए जाएंगे।
जेपी नड्डा ने क्या कहा?
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार आंदोलनकारियों की बात सुनने और समाधान तलाशने के उद्देश्य से बातचीत के लिए आई थी।
उन्होंने कहा,
"बातचीत सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। आंदोलनकारियों की तीन प्रमुख मांगें हमारे सामने रखी गई हैं। हमने उनसे कहा है कि कल दोपहर बाद फिर मुलाकात होगी और आगे चर्चा की जाएगी।"
दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस पिछले रात से और सोमवार को भी कई युवाओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में ले रही है। संगठन ने इस पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
आशुतोष रांका बोले- पूरे देश की यही मांग
सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने कहा कि देशभर में यह भावना है कि धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए या उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार के साथ विस्तार से चर्चा हुई है।
अब सबकी नजर कल की बैठक पर
सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगों पर निर्णय लेने के लिए एक दिन का समय मांगा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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