हर ग्राम में बनेगी एक "लखपति गोपालक दीदी", पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से बढ़ेगी ग्रामीण आय

 कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने संभागीय समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

भोपाल, 8 जून 2026। मध्यप्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पशुपालन तथा मत्स्य पालन को आय का प्रमुख स्रोत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ग्राम में कम से कम एक "लखपति गोपालक दीदी" तैयार करने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए। इसके लिए महिला स्व-सहायता समूहों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा।



सोमवार को इंदौर में आयोजित पशुपालन, डेयरी एवं मछुआ कल्याण विभाग की संयुक्त संभागीय समीक्षा बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री बर्णवाल ने कहा कि पशुपालन को केवल सहायक व्यवसाय न मानकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव, सचिव मत्स्य पालन स्वतंत्र कुमार सिंह, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्षीरधारा ग्राम योजना से मिलेगा दुग्ध व्यवसाय को नया आयाम

बैठक में क्षीरधारा ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि गांवों में दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय को संगठित स्वरूप देकर किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि की जाए। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

उन्होंने हिरण्यगर्भ नस्ल सुधार अभियान को परिणाममूलक तरीके से संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि कृत्रिम गर्भाधान और आधुनिक प्रजनन तकनीकों के उपयोग से उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाई जाए। इससे पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन को नई गति मिलेगी।

पशु पोषण और स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस

श्री बर्णवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पशुपालकों को संतुलित एवं पौष्टिक पशु आहार की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा और दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।

प्रदेश बनेगा उन्नत नस्ल के पशुओं में आत्मनिर्भर

प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने कहा कि वर्तमान में कई पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशुओं के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि प्रदेश में ही गुणवत्तापूर्ण नस्ल के पशुओं का पर्याप्त उत्पादन होगा तो पशुपालकों को कम लागत पर बेहतर पशु उपलब्ध हो सकेंगे। इससे उनकी आय बढ़ेगी और प्रदेश पशुधन विकास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

बैठक में ब्रीडर संघों के गठन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पशु प्रजनन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को संगठित कर ब्रीडर संघ बनाए जाएं ताकि नस्ल सुधार कार्यक्रमों को गति मिल सके।

कामधेनु योजना से बढ़ेंगे स्वरोजगार के अवसर

कृषि उत्पादन आयुक्त ने डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए। योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों को स्वरोजगार तथा आयवृद्धि के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

गोशालाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर

बैठक में गोशालाओं की स्थिति और संचालन की समीक्षा करते हुए श्री बर्णवाल ने कहा कि गोशालाओं को आधुनिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। गोशालाएं केवल पशु संरक्षण केंद्र न रहकर जैविक खेती, गोबर गैस, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य आयवर्धक गतिविधियों का केंद्र बनें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मत्स्य पालन में केज कल्चर को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाया जाए।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने केज कल्चर (केज पद्धति) को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से जलाशयों में केज स्थापित कर कम क्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे मछुआरों की आय बढ़ेगी और प्रदेश के मत्स्य उत्पादन को नई दिशा मिलेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

श्री बर्णवाल ने कहा कि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों, पशुपालकों तथा मछुआरों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। अधिकारियों को सभी योजनाओं का समयबद्ध, परिणाममूलक और जनहितकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।


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