लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तेज सिंह सेंधव ने दिलाया आपातकाल का स्मरण

संविधान सर्वोपरि है और रहेगा, लोकतंत्र सेनानियों का बलिदान अविस्मरणीय 



भोपाल। संविधान हत्या दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संघ, मध्य प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी डॉ. तेज सिंह सेंधव ने वर्ष 1975 से 1977 तक लागू रहे आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए लोकतंत्र सेनानियों के साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का आपातकाल लोकतांत्रिक अधिकारों पर सबसे बड़ा प्रहार था, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।


डॉ. सेंधव ने बताया कि लोकतंत्र सेनानी संघ आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले और जेल यातनाएं सहने वाले सेनानियों का अखिल भारतीय संगठन है। संगठन का प्रतीक चिन्ह मशाल लोकतंत्र की अखंड ज्योति, स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

देवास जिले की हाटपिपलिया विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे डॉ. तेज सिंह सेंधव स्वयं आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की बहाली के संघर्ष में सक्रिय रहे और कारावास की यातनाएं झेलीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अपने संदेश में डॉ. सेंधव ने कहा, "आज लोकतंत्र सेनानियों के साहस और बलिदान को नमन करते हुए यह संकल्प दोहराता हूं कि संविधान सर्वोपरि है और रहेगा। संविधान हत्या दिवस उस काले अध्याय को कभी न भूलने और लोकतंत्र की रक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।"

 


उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष से प्रेरणा लें तथा संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग और प्रतिबद्ध रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानी संघ का प्रत्येक सदस्य लोकतंत्र का प्रहरी है और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

जारीकर्ता
हरीश नागर

Comments

Popular posts from this blog

महाशिवरात्रि पर्व 2026: आस्था, साधना, विज्ञान और सामाजिक समरसता का महापर्व

UGC Act 2026: उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय या नया असंतुलन?

संत रविदास : समता, श्रम और मानव गरिमा के अमर साधक