3 एकड़ में पॉलीहाउस लगाया, अब साल में लाखों कमा रहे उज्जैन के किसान तेजराम नागर"

 उज्जैन, 08 जून। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसान आज सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण उज्जैन जिले के ग्राम रुणिजा के प्रगतिशील किसान तेजराम नागर हैं, जिन्होंने पॉलीहाउस खेती के माध्यम से अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।



उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर तेजराम नागर ने लगभग 3 एकड़ भूमि पर आधुनिक पॉलीहाउस स्थापित किया और उसमें खीरा (ककड़ी) की उन्नत खेती शुरू की। आज उनकी मेहनत और नई तकनीक का परिणाम यह है कि उन्हें लागत की तुलना में तीन से चार गुना अधिक लाभ मिल रहा है।

शासन की योजना बनी सफलता की सीढ़ी

तेजराम नागर को मध्यप्रदेश शासन की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत 16.88 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इसी सहायता से उन्होंने पॉलीहाउस का निर्माण कराया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया।

उनका कहना है कि यदि किसान नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें तो खेती घाटे का नहीं, बल्कि अच्छे मुनाफे का व्यवसाय बन सकती है।

एक एकड़ में 80 टन तक खीरे का उत्पादन

तेजराम नागर बताते हैं कि पॉलीहाउस में एक एकड़ भूमि से औसतन 70 से 80 टन खीरे का उत्पादन प्राप्त हो रहा है। तैयार खीरे को 40 किलो के बॉक्स में पैक कर मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ-साथ गुजरात की मंडियों में भी भेजा जा रहा है।

बेहतर गुणवत्ता के कारण उनके उत्पाद की बाजार में लगातार मांग बनी हुई है, जिससे उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं।

एक सीजन में 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

तेजराम नागर के पास लगभग 25 बीघा कृषि भूमि है, जहां वे मिर्च, प्याज और लहसुन जैसी फसलें भी लेते हैं। वहीं पॉलीहाउस में खीरे की खेती कर रहे हैं।

पॉलीहाउस तकनीक अपनाने के बाद उन्हें एक सीजन में 8 से 10 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ हो रहा है। वर्ष में दो बार फसल लेने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ड्रिप सिंचाई और जैविक खेती का भी लाभ

किसान तेजराम नागर ने शासन की योजनाओं के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई संयंत्र भी स्थापित किए हैं। इससे पानी की बचत होने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। वे अपनी कुछ भूमि पर जैविक खेती भी कर रहे हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

तेजराम नागर ने अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं को दिया है। उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लें, तो खेती से बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।

ग्राम रुणिजा के किसान की यह सफलता आज जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। यह कहानी बताती है कि मेहनत, तकनीक और सही मार्गदर्शन के साथ खेती में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

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