ग्रीन सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज: मां क्षिप्रा के घाट हरियाली से होंगे आच्छादित, आरती को मिलेगा भव्य स्वरूप
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ‘श्री महाकाल वन’ परिकल्पना को साकार करने की दिशा में बैठक, उज्जैन में 10 लाख पौधे लगाने की तैयारी
उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को पर्यावरण और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “श्री महाकाल वन” परिकल्पना के तहत मां क्षिप्रा नदी के घाटों को हरियाली से आच्छादित किया जाएगा और क्षिप्रा आरती को और अधिक भव्य स्वरूप दिया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को दिव्य और आध्यात्मिक अनुभव मिल सके।
इसी उद्देश्य से शनिवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय में ग्रीन सिंहस्थ 2028 को मूर्त रूप देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने की। इस अवसर पर संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। बैठक में नगर निगम, स्मार्ट सिटी, वन विभाग, उद्यानिकी विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मां क्षिप्रा के घाटों पर बढ़ेगी हरियाली
बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन शहर को हराभरा बनाने के लिए वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा।
इसके तहत शहर के प्रमुख मार्गों, घाटों, उद्यानों और खाली स्थानों पर छायादार, फलदार और फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। इससे एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं को भी छाया और स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
10 लाख पौधे लगाए जाएंगे
उज्जैन नगर निगम द्वारा उज्जैन शहरी वनीकरण परियोजना के तहत नगर निगम सीमा में करीब 10 लाख पौधे लगाने की योजना बनाई गई है।
ये पौधे शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—
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विक्रम विश्वविद्यालय परिसर
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एमआर-5 मार्ग
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मेघदूत पार्किंग क्षेत्र
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चकोर पार्क
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शक्ति पथ रोड
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पीलिया खाल नाले के दोनों किनारे
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शहर के 400 से अधिक उद्यान
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प्रमुख सड़कों के किनारे और डिवाइडर
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संस्थानों और सरकारी कार्यालयों के परिसर
इससे उज्जैन में हरियाली बढ़ेगी और शहर का वातावरण भी स्वच्छ बनेगा।
लगाए जाएंगे छायादार और फलदार पौधे
बैठक में निर्देश दिए गए कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गुलमोहर, पलाश, टिकोमा, अमलताश, कचनार, आम, अमरूद, बेलपत्र, नीम, पीपल, इमली, शीशम और जामुन जैसे पौधे लगाए जाएं।
इन पौधों से शहर में हरियाली बढ़ेगी और गर्मी के मौसम में सड़कों पर चलने वाले लोगों को छाया भी मिलेगी।
पौधों की देखरेख के लिए जियो-टैगिंग
पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखरेख पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि उनकी स्थिति और विकास की नियमित निगरानी की जा सके।
साथ ही पौधों के अच्छे विकास के लिए नगर निगम को गीले कचरे से वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने और जलकुंभी से जैविक खाद तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
सामाजिक संस्थाएं भी निभाएंगी जिम्मेदारी
बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर के उद्यानों और सड़कों के किनारे लगाए जाने वाले पौधों की देखरेख के लिए सामाजिक संस्थाओं और नागरिक संगठनों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी।
संस्थाओं को उद्यान गोद देने की योजना से नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और पौधों का बेहतर रखरखाव हो सकेगा।
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर यातायात व्यवस्था
संभागायुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि सिंहस्थ और अन्य बड़े पर्वों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिले के प्रमुख मार्गों का सर्वे कराया जा रहा है।
यातायात को सुचारु बनाने के लिए सड़कों का सुधार और आवश्यक विकास कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रमुख मार्गों पर ई-वी चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
समय पर पूरे होंगे विकास कार्य
बैठक में उज्जैन विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी और नगर निगम द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्य गुणवत्ता के साथ और तय समयसीमा में पूरे किए जाएं।
बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्रेयांस कूमट, यूडीए सीईओ संदीप सोनी, स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
आध्यात्मिकता और पर्यावरण का बनेगा उदाहरण
सिंहस्थ 2028 को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मां क्षिप्रा के घाटों पर बढ़ती हरियाली, भव्य आरती और आधुनिक सुविधाओं के साथ उज्जैन आने वाले वर्षों में आध्यात्मिक पर्यटन का एक नया मॉडल बन सकता है।

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