बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में सशक्त पहल
जन-जागरूकता अभियान के तहत उज्जैन में प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन
उज्जैन : रविवार, 1 फरवरी 2026,
उज्जैन जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एक सशक्त और प्रभावी जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत रविवार को एक प्रेरक पहल देखने को मिली। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के निर्देशानुसार चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत उज्जैन शहर के प्रमुख धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया।
यह नुक्कड़ नाटक अनवरत थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने अपने सशक्त अभिनय, संवादों और भावनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से समाज में गहरी जड़ें जमाए बाल विवाह जैसे अपराध के विरुद्ध एक सशक्त संदेश दिया।
चार धाम मंदिर और महाकाल क्षेत्र बना जागरूकता का केंद्र
इस जन-जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत उज्जैन के चार धाम मंदिर क्षेत्र एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। इन स्थानों का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक, महिलाएं और बच्चे एकत्रित होते हैं।
नुक्कड़ नाटक के दौरान राहगीरों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। कुछ ही मिनटों में पूरा क्षेत्र संवेदनशील मौन और आत्ममंथन के वातावरण में बदल गया।
नुक्कड़ नाटक: जब अभिनय बना समाज का आईना
नुक्कड़ नाटक की कहानी एक साधारण ग्रामीण परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और रूढ़िवादी सोच के कारण एक नाबालिग लड़की का विवाह तय कर दिया जाता है।
नाटक में यह दर्शाया गया कि कैसे बाल विवाह:
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बच्चियों के शिक्षा के अधिकार को छीन लेता है
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उनके स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डालता है
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मानसिक और सामाजिक विकास को अवरुद्ध करता है
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पूरे समाज के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है
कलाकारों ने यह भी बताया कि बाल विवाह केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि एक कानूनी अपराध है, जिसके लिए कानून में कठोर दंड का प्रावधान है।
कानून और जिम्मेदारी की जानकारी सरल भाषा में
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को यह भी बताया गया कि:
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भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह दंडनीय अपराध है
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बाल विवाह में शामिल माता-पिता, रिश्तेदार, पंडित, बिचौलिये सभी दोषी माने जाते हैं
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किसी भी बाल विवाह की सूचना प्रशासन को देना नागरिक का कर्तव्य है
कलाकारों ने यह संदेश स्पष्ट किया कि चुप रहना भी अपराध को बढ़ावा देना है।
बाल संरक्षण और बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर
नुक्कड़ नाटक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा। नाटक में दिखाया गया कि जब एक बच्ची को पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो वह केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।
कलाकारों ने प्रभावी संवादों के माध्यम से बताया कि:
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शिक्षित बेटी, सशक्त समाज की नींव होती है
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बाल विवाह रोकना ही सच्चा राष्ट्र निर्माण है
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बेटियों को बोझ नहीं, भविष्य की शक्ति समझें
महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं का प्रचार
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना ही नहीं, बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुँचाना भी था।
नुक्कड़ नाटक के दौरान नागरिकों को बताया गया कि:
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सरकार महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है
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शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और संरक्षण से जुड़ी कई योजनाएं संचालित हैं
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आवश्यकता पड़ने पर महिलाएं और बच्चे विभाग से सहायता प्राप्त कर सकते हैं
इस प्रकार यह कार्यक्रम मनोरंजन के साथ-साथ जागरूकता का सशक्त माध्यम साबित हुआ।
प्रशासनिक एवं सामाजिक प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस जन-जागरूकता कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
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जिला किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य श्री विजेंद्र सिंह अरुणिया
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वार्ड क्रमांक 33 की पार्षद श्रीमती लीला
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श्री महाकाल थाना से बाल कल्याण अधिकारी
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विधि सह परिवीक्षा अधिकारी श्रीमती प्रियंका त्रिपाठी
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परामर्शदाता श्रीमती मृणाल भिलाला
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सुश्री उषा नायक
इन सभी ने नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह रोकने में प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता
कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी अत्यंत सराहनीय रही। महिलाओं ने खुलकर अपनी राय रखी और बच्चों ने नाटक से जुड़कर सवाल पूछे, जो यह दर्शाता है कि समाज में जागरूकता की नींव मजबूत हो रही है।
कई नागरिकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सिर्फ भाषणों से अधिक प्रभावी होते हैं, क्योंकि यह सीधे दिल और दिमाग को छूते हैं।
100 दिवसीय विशेष अभियान का उद्देश्य
जिला महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाया जा रहा यह 100 दिवसीय विशेष अभियान बाल विवाह के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।
इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं:
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बाल विवाह की घटनाओं को रोकना
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समाज में जागरूकता बढ़ाना
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कानून की जानकारी देना
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बालिकाओं को शिक्षा और सुरक्षा से जोड़ना
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समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करना
सामाजिक बदलाव की ओर एक मजबूत कदम
उज्जैन में आयोजित यह नुक्कड़ नाटक यह साबित करता है कि सामाजिक बदलाव केवल कानून से नहीं, बल्कि जनचेतना से आता है। जब समाज खुद आगे बढ़कर कुरीतियों के खिलाफ खड़ा होता है, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होता है।
निष्कर्ष: बाल विवाह मुक्त भारत – हम सबकी जिम्मेदारी
यह जन-जागरूकता कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला प्रयास है। बाल विवाह जैसी प्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए प्रशासन, समाज और हर नागरिक को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
एक जागरूक समाज ही बाल विवाह मुक्त भारत का सपना साकार कर सकता है।

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