सिंहस्थ 2028 के लिए माइक्रो प्लानिंग शुरू, 7 लाख वाहनों की पार्किंग का खाका तैयार

 

उज्जैन, 26 फरवरी 2026। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की उलटी गिनती अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद प्रशासनिक अमला हर स्तर पर बारीकी से रणनीति बनाने में जुट गया है। इसी क्रम में संभागायुक्त आशीष सिंह और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश गुप्ता ने कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के साथ सिंहस्थ मेला कार्यालय में तीन घंटे से अधिक समय तक संभावित पार्किंग और यातायात प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की।



बैठक में नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार केवल सामान्य तैयारी नहीं, बल्कि “माइक्रो प्लानिंग” के माध्यम से हर संभावित स्थिति पर सूक्ष्म दृष्टि रखी जा रही है।

 



12 से अधिक पार्किंग स्थल, 5 से 7 लाख वाहनों की व्यवस्था

समीक्षा बैठक में बताया गया कि उज्जैन से जुड़ने वाले फोर लेन, सिक्स लेन बायपास और प्रमुख मार्गों के समीप 12 से अधिक बड़े पार्किंग स्थलों का चयन किया जा रहा है। संभावित योजना के अनुसार—

  • लेवल-1 पार्किंग : लगभग 1 लाख वाहन

  • लेवल-2 पार्किंग : लगभग 2 से 3 लाख वाहन

  • लेवल-3 पार्किंग : लगभग 3 से 4 लाख वाहन

इस प्रकार कुल मिलाकर 5 से 7 लाख वाहनों की पार्किंग क्षमता विकसित करने की तैयारी है। इंदौर रोड, बड़नगर रोड, गरोठ रोड और आगर रोड के आसपास उपयुक्त भूमि का चयन कर विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है।


घाट से 1-2 किमी की परिधि में पार्किंग

प्रशासन की प्राथमिकता है कि श्रद्धालुओं को अत्यधिक पैदल दूरी न तय करनी पड़े। बैठक में यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि पार्किंग स्थल नदी घाट से 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पर न हों। जहां तक संभव हो, 1 से 2 किलोमीटर की परिधि में ही पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

पार्किंग स्थलों से घाट तक पक्के मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से स्नान के लिए पहुंच सकें। साथ ही पार्किंग क्षेत्रों में पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।


 



पिछले अनुभवों से सीख, इस बार और सख्त रणनीति

एडीजी राकेश गुप्ता ने निर्देश दिए कि पिछले सिंहस्थ के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार यातायात को और अधिक सुचारू बनाया जाए। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालु शीघ्रता से घाट तक पहुंचें, स्नान कर सकें और बिना अनावश्यक भीड़ के अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सकें।

इसके लिए—

  • वैकल्पिक मार्गों का विकास

  • प्रमुख मार्गों पर अंडरपास निर्माण

  • देवास-इंदौर मार्ग के बीच नए रूट

  • बड़नगर और इंदौर कनेक्टिविटी के वैकल्पिक रास्ते

जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।


हर मार्ग के लिए अलग रणनीति

इंदौर और देवास की ओर से आने वाले वाहनों की संख्या सबसे अधिक रहने की संभावना है। इसके अलावा बड़नगर, बदनावर, गरोठ, आगर और मक्सी की ओर से आने वाले यातायात के लिए भी पृथक योजना तैयार की जा रही है। प्रत्येक मार्ग की संभावित भीड़ का आकलन कर उसी अनुसार पार्किंग और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान बनाया जाएगा।


संभागायुक्त का बयान

संभागायुक्त आशीष सिंह ने बताया कि “सिंहस्थ 2028 के लिए माइक्रो प्लानिंग के तहत हर छोटे-बड़े पहलू का सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बेहतर पार्किंग, सुगम यातायात और न्यूनतम असुविधा के साथ सुरक्षित स्नान का अवसर मिले।”


 



निष्कर्ष

सिंहस्थ 2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता और समन्वय की भी परीक्षा है। 7 लाख वाहनों की पार्किंग, बहु-स्तरीय ट्रैफिक प्लान, वैकल्पिक मार्ग और घाट तक सुव्यवस्थित पहुंच की योजना इस बात का संकेत है कि इस बार प्रशासन “इवेंट मैनेजमेंट” नहीं, बल्कि “सिस्टम मैनेजमेंट” के मॉडल पर काम कर रहा है।

यदि माइक्रो प्लानिंग जमीनी स्तर पर उतनी ही प्रभावी सिद्ध होती है जितनी कागजों पर दिख रही है, तो सिंहस्थ 2028 देश और दुनिया के लिए सुव्यवस्थित धार्मिक आयोजन का उदाहरण बन सकता है।

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