कृषक कल्याण वर्ष-2026 : कृषि रथ के जरिए किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी

 नरसिंहपुर और रतलाम सहित कई जिलों में भ्रमण, ई-टोकन उर्वरक वितरण और पराली प्रबंधन पर जोर

भोपाल | बुधवार, 11 फरवरी 2026



कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत प्रदेश में किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा कृषि रथों का संचालन किया जा रहा है, जो गांव-गांव पहुंचकर किसानों को नई तकनीकों, योजनाओं और आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी दे रहे हैं।

इसी क्रम में नरसिंहपुर जिले के सभी छह विकासखंडों में कृषि रथ का भ्रमण जारी है। इसके माध्यम से किसानों को ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन उर्वरक वितरण), उन्नत कृषि यंत्रों, फसल विविधीकरण और लाभकारी खेती के उपायों की जानकारी दी जा रही है।


ई-विकास प्रणाली और योजनाओं की जानकारी

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को ई-विकास प्रणाली के तहत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है, जिससे उर्वरकों का वितरण पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो सके। किसानों को बताया जा रहा है कि ई-टोकन व्यवस्था से उन्हें समय पर उर्वरक उपलब्ध होंगे और अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।

इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि के विस्तार जैसे विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों द्वारा किसानों को यह भी समझाया जा रहा है कि मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत कम की जा सकती है और पैदावार बढ़ाई जा सकती है।



आधुनिक कृषि यंत्रों से समय और लागत में बचत

कृषि रथ के जरिए किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के आधुनिक यंत्रों की तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • सुपर सीडर

  • हैप्पी सीडर

  • जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल

  • स्ट्रॉ रीपर

  • रीपर कम बाइंडर

शामिल हैं।

किसानों को बताया गया कि सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे यंत्र खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी का कार्य एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से श्रम, समय और लागत में उल्लेखनीय बचत होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और उत्पादन बेहतर मिलता है।



पराली न जलाने की समझाइश

कृषि विभाग द्वारा किसानों को विशेष रूप से नरवाई न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसके विपरीत यदि नरवाई को खेत में ही मिलाकर खाद के रूप में उपयोग किया जाए, तो यह भूमि की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होती है।

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक विकल्पों के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन भी बढ़ाया जा सके।


रतलाम जिले में भी जागरूकता अभियान

रतलाम जिले में भी कृषि रथ के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों—उद्यानिकी, पशुपालन, आत्मा योजना और मत्स्य पालन—के विषय में किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। इससे किसानों को नवीन और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी सीधे विशेषज्ञों से मिल रही है।

यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बहुआयामी और लाभकारी कृषि अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। फसल विविधीकरण, जैविक खेती और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और अन्य विभागीय योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।


कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में प्रयास

कृषि विभाग का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए किसानों को बाजार उन्मुख खेती, आधुनिक तकनीक, संतुलित उर्वरक उपयोग और जल संरक्षण के उपायों से अवगत कराया जा रहा है।

कृषि रथ अभियान से गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ रही है और किसान नई तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक पद्धतियों को सही तरीके से अपनाया जाए तो उत्पादन लागत कम होगी और आय में वृद्धि संभव होगी।



किसानों में बढ़ रहा उत्साह

नरसिंहपुर और रतलाम जिलों में कृषि रथ के पहुंचने पर किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में किसान भाग ले रहे हैं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त कर रहे हैं।

कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत चलाया जा रहा यह अभियान प्रदेश में आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

महाशिवरात्रि पर्व 2026: आस्था, साधना, विज्ञान और सामाजिक समरसता का महापर्व

UGC Act 2026: उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय या नया असंतुलन?

संत रविदास : समता, श्रम और मानव गरिमा के अमर साधक