उज्जैन में ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर सशर्त प्रतिबंध, परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को मिलेगी राहत

 

उज्जैन, 10 फरवरी 2026 (मंगलवार)



विद्यार्थियों की सुविधा और परीक्षाओं के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले की राजस्व सीमा में ध्वनि विस्तारक यंत्रों (डीजे, बैंड, लाउडस्पीकर) के उपयोग पर सशर्त प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। यह आदेश कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह द्वारा जारी किया गया है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने अवगत कराया कि वर्तमान में जिले के शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाएं संचालित हो रही हैं। इसी बीच विवाह समारोह और अन्य आयोजनों में तेज ध्वनि में डीजे व लाउडस्पीकर का उपयोग विद्यार्थियों के अध्ययन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।


भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(1) के तहत निषेधाज्ञा


कानून-व्यवस्था, शांति, आमजन की सुरक्षा एवं विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(1) के अंतर्गत निषेधाज्ञा लागू की गई है।

इसके तहत:

  • कोई भी व्यक्ति, समूह या संस्था बिना अनुमति डीजे, बैंड या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग नहीं करेगा।

  • अनुमति प्राप्त होने पर भी निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य होगा।


इन नियमों का करना होगा पालन

ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए निम्न प्रावधान लागू रहेंगे:

  • मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985

  • The Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000

  • ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2010

⏰ समय सीमा

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग
सुबह 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही किया जा सकेगा।

🔊 ध्वनि सीमा

निर्धारित परिवेशीय ध्वनि मानक से 10 डेसिबल से अधिक ध्वनि करने वाले लाउडस्पीकर पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगे।



200 मीटर दायरे में पूर्ण प्रतिबंध

निम्न स्थानों से 200 मीटर की दूरी के भीतर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा:

  • चिकित्सालय

  • नर्सिंग होम

  • न्यायालय

  • शिक्षण संस्थान

  • शासकीय कार्यालय

  • बैंक

  • दूरभाष केन्द्र


प्रशासनिक अधिकारियों को वैधानिक छूट

कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु ड्यूटी पर तैनात पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा उनके वाहनों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। आवश्यक परिस्थिति में उन्हें वैधानिक छूट प्राप्त रहेगी।


अनुमति प्रक्रिया

जिले में पदस्थ अनुविभागीय दण्डाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में नगर पुलिस अधीक्षक/अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) से परामर्श कर आवश्यक शर्तों सहित कार्यक्रमों के लिए अनुमति प्रदान करने के लिए अधिकृत होंगे।


उल्लंघन पर कड़ी सजा

यदि कोई व्यक्ति इस आदेश या संबंधित अधिनियमों का उल्लंघन करता है तो:

⚖ मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के तहत:

  • 6 माह तक का कारावास

  • ₹1000 तक का जुर्माना

  • या दोनों

⚖ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत):

  • 5 वर्ष तक की सजा

  • ₹1,00,000 तक का जुर्माना

  • या दोनों

इसके अतिरिक्त, उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत भी दंडनीय अपराध माना जाएगा।


दो माह तक रहेगा प्रभावी

यह आदेश 09 फरवरी 2026 से आगामी दो माह तक प्रभावशील रहेगा।

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