कपड़े, फैशन और सोशल मीडिया की छवि से परे असली लक्ष्य की तलाश : युवाओं को आईना दिखाता श्री अनिल स्वरूप का संदेश
उज्जैन | 19 फरवरी 2026
आज का युवा अवसरों के विस्तृत आकाश में खड़ा है, लेकिन उसी आकाश में भ्रम के बादल भी तेजी से घिर रहे हैं। कपड़े, फैशन, ब्रांडेड जीवनशैली और सोशल मीडिया पर परफेक्ट छवि गढ़ने की होड़ कई बार उसे उसके वास्तविक लक्ष्य से दूर ले जाती है। इसी संवेदनशील विषय पर सशक्त और प्रेरक उद्बोधन देते हुए भारत सरकार के पूर्व सचिव और नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन प्रभारी रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल स्वरूप ने युवाओं को आत्ममंथन का संदेश दिया।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित “ऊर्जा-सेतु” व्याख्यान श्रृंखला के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने “यू केन मेक इट हैप्पन – आप इसे संभव बना सकते हैं” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा—
“आप समय की कमी से नहीं, समय के दुरुपयोग से हारते हैं।”
‘ऊर्जा-सेतु’ : संवाद और दिशा का मंच
यह व्याख्यान विक्रमोत्सव-2026 (विक्रम संवत 2082) के अंतर्गत सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संगठन ‘विक्रम विश्वविद्यालय एल्यूमनाई एसोसिएशन’ द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने की।
‘ऊर्जा-सेतु’ श्रृंखला का उद्देश्य वर्तमान विद्यार्थियों और अनुभवी पूर्व छात्रों के बीच वैचारिक सेतु बनाना है, ताकि शिक्षा, करियर और जीवन की चुनौतियों के बीच संतुलित दृष्टिकोण विकसित हो सके।
समय की कमी नहीं, प्राथमिकताओं की कमी
अपने संबोधन में श्री स्वरूप ने युवाओं से एक सीधा प्रश्न पूछा—
“आप अपने 24 घंटे में से कितने घंटे अपने लक्ष्य को देते हैं?”
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग समय के अभाव का रोना रोते हैं, जबकि वास्तविक समस्या समय का गलत उपयोग है। राजनीति की बहसों, सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं और दूसरों की आलोचना में हम अपनी ऊर्जा नष्ट कर देते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सफल और असफल व्यक्ति के बीच अंतर प्रतिभा का नहीं, बल्कि टाइम एलोकेशन का होता है। जो व्यक्ति अपने समय को नियंत्रित कर लेता है, वह अपने भविष्य को भी नियंत्रित कर सकता है।
फैशन और सोशल मीडिया : दिखावे का दबाव
श्री स्वरूप ने समाज में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का युवा कई बार अपने निर्णय दूसरों को प्रभावित करने के लिए लेता है।
कपड़े, फैशन, महंगे गैजेट्स और सोशल मीडिया पर लाइक्स की संख्या—ये सब मिलकर एक कृत्रिम प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा—
“कपड़े, फैशन और सोशल मीडिया पर छवि बनाने की दौड़ व्यक्ति को उसके वास्तविक लक्ष्य से दूर कर देती है।”
उन्होंने युवाओं को “स्वान्तःसुखाय” की भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी—अर्थात अपने आत्मसंतोष के लिए कार्य करें, न कि केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए।
असफलता का भय : सफलता की सबसे बड़ी बाधा
व्याख्यान के दौरान श्री स्वरूप ने ‘फियर ऑफ फेलियर’ यानी असफलता के भय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गलती करना स्वाभाविक है, लेकिन गलती से न सीखना सबसे बड़ी विफलता है।
“गलतियाँ आपकी दुश्मन नहीं, आपकी शिक्षक हैं।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि असफलता को अंत न मानें, बल्कि प्रक्रिया का हिस्सा समझें। जीवन एक परीक्षा नहीं, बल्कि निरंतर सीखने की यात्रा है।
अतीत, वर्तमान और भविष्य का संतुलन
समय के तीन आयाम—अतीत, वर्तमान और भविष्य—पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अतीत बदला नहीं जा सकता, पर उससे सीख ली जा सकती है। भविष्य की अत्यधिक चिंता व्यक्ति को वर्तमान से भटका देती है।
“अगर आप आज के एक-एक पल को मजबूत बनाएँगे, तो भविष्य अपने आप मजबूत बन जाएगा। जीवन एक दिन में नहीं बदलता, यह ईंट-दर-ईंट बनता है।”
यह संदेश केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो अपने जीवन में दिशा तलाश रहा है।
नियंत्रण में क्या है, उस पर ध्यान दें
उन्होंने दैनिक जीवन के उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रैफिक जाम, पेट्रोल की कीमतें या राजनीतिक निर्णय जैसे विषयों पर चिंता करना व्यर्थ है, क्योंकि ये हमारे नियंत्रण में नहीं हैं।
“जो आपके नियंत्रण में है—आपका समय, आपका प्रयास और आपकी दिशा—उसी पर ध्यान केंद्रित कीजिए।”
यह विचार आधुनिक मानसिक तनाव की समस्या का सरल समाधान प्रस्तुत करता है।
प्रश्नोत्तर सत्र : युवाओं की जिज्ञासाएँ
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, लक्ष्य निर्धारण और प्रशासनिक चुनौतियों से जुड़े प्रश्न पूछे।
श्री स्वरूप ने छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने, दैनिक दिनचर्या बनाने और स्वयं के प्रति ईमानदार रहने की सलाह दी। उत्कृष्ट प्रश्न पूछने वाले दो विद्यार्थियों को उनकी पुस्तक “यू कैन मेक इट हैपन” भेंट कर सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व विकसित करने का केंद्र है।
उन्होंने शोध, शिक्षा नीति और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘ऊर्जा-सेतु’ जैसी पहल विद्यार्थियों को अपने जीवन लक्ष्य के प्रति सजग बनाएगी।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और विश्वविद्यालय कुलगान की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
नई शिक्षा नीति और जीवन कौशल
नई शिक्षा नीति 2020, जिसके क्रियान्वयन में श्री स्वरूप की महत्वपूर्ण भूमिका रही, केवल पाठ्यक्रम सुधार तक सीमित नहीं है। यह विद्यार्थियों को जीवन कौशल, आत्मनिर्भरता और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है।
आज जब डिजिटल दुनिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, तब शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि संतुलित और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
सोशल मीडिया का मनोवैज्ञानिक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर निरंतर तुलना व्यक्ति में हीनभावना और चिंता बढ़ा सकती है। जब युवा अपनी पहचान ‘ऑनलाइन छवि’ से जोड़ लेते हैं, तो वास्तविक जीवन की उपलब्धियाँ गौण हो जाती हैं।
श्री स्वरूप का संदेश इस प्रवृत्ति के विरुद्ध एक चेतावनी है। वे युवाओं को याद दिलाते हैं कि लाइक्स और फॉलोअर्स से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मविश्वास और आत्मसंतोष।
निष्कर्ष : असली दौड़ स्वयं से है
श्री अनिल स्वरूप का व्याख्यान केवल प्रेरक भाषण नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर था। उन्होंने युवाओं को बताया कि असली प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, स्वयं से है।
यदि समय का सही उपयोग किया जाए, असफलता से सीखा जाए और दिखावे की बजाय लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए, तो सफलता निश्चित है।
आज जब फैशन, ब्रांड और सोशल मीडिया की चमक-दमक युवाओं को आकर्षित कर रही है, तब यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है—
“आप इसे संभव बना सकते हैं।”
यही विश्वास, यही आत्मबल और यही स्पष्ट दिशा युवाओं को उनके वास्तविक लक्ष्य तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

Comments
Post a Comment