भारत-अमेरिका ट्रेड डील: किसानों के लिए खतरा या अवसर? — गहन विश्लेषणात्मक संपादकीय
( RAGHUVIR SINGH PANWAR )
वैश्विक व्यापार और भारतीय किसान के बीच खड़ा एक बड़ा सवाल
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (Trade Deal) ने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर सरकार इसे भारत के निर्यात, निवेश और आर्थिक विकास के लिए अवसर बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष, किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों ने इसे भारतीय किसानों के लिए संभावित खतरा बताया है।
यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत के करोड़ों किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और कृषि नीति के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
ट्रेड डील क्या है और इसमें क्या प्रस्तावित है?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, टैरिफ (आयात शुल्क) कम करना और बाजार पहुंच आसान बनाना है। इसके तहत कुछ कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात पर रियायतें दी जा रही हैं।
इस समझौते के तहत भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे सोया तेल, DDG (Distillers Dried Grains), कपास और कुछ फलों के आयात पर शुल्क कम करने या हटाने पर सहमति जताई है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत के 90-95% कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है, जिससे किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता: सस्ते आयात से गिरती कीमतें
1. सोयाबीन और मक्का की कीमतों में गिरावट
ट्रेड डील की घोषणा के बाद भारत में सोयाबीन और मक्का की कीमतों में गिरावट देखी गई है। सोयाबीन की कीमत लगभग 10% तक गिर गई, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ा है।
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सोयाबीन और कपास की कीमतें MSP से नीचे तक चली गईं, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।
यह स्थिति दर्शाती है कि केवल आयात की घोषणा या संभावना भी बाजार को प्रभावित कर सकती है।
2. DDG आयात से पशुपालन और फसल क्षेत्र प्रभावित
DDG एक प्रोटीन-समृद्ध पशु चारा है, जो अमेरिका में मक्का से बनाया जाता है। भारत द्वारा DDG आयात की अनुमति देने से घरेलू पशु चारा उद्योग और सोयाबीन किसानों को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि DDG आयात GM (Genetically Modified) उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रवेश का माध्यम बन सकता है।
इससे घरेलू सोयाबीन और मक्का की मांग कम हो सकती है, जिससे किसानों की आय घट सकती है।
MSP और कृषि सुरक्षा पर खतरा?
MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भारत की कृषि सुरक्षा प्रणाली की रीढ़ है। यह किसानों को न्यूनतम कीमत की गारंटी देता है।
लेकिन यदि सस्ते आयात बढ़ते हैं, तो बाजार में कीमतें गिर सकती हैं, जिससे MSP प्रणाली कमजोर पड़ सकती है।
विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई है कि अमेरिकी उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
GM (Genetically Modified) उत्पादों का विवाद
भारत में GM फसलों को लेकर सख्त नियम हैं। लेकिन DDG और सोया तेल के आयात से GM उत्पाद अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकते हैं।
इससे भारत की जैव सुरक्षा नीति और कृषि स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी किसानों को ज्यादा सब्सिडी, भारतीय किसानों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा
अमेरिका में किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम होती है।
इसके विपरीत भारत में किसानों को सीमित आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे वे अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा में कमजोर हो सकते हैं।
यह असमानता भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
क्या भारत को भी इस डील से फायदा होगा?
ट्रेड डील के कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं:
1. भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा
भारत के चाय, कॉफी, मसाले, फल और चावल जैसे उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
2. पोल्ट्री और पशुपालन उद्योग को फायदा
DDG आयात से पशु चारा सस्ता होगा, जिससे पोल्ट्री उद्योग की लागत कम होगी।
3. भारतीय उद्योगों के लिए अवसर
ट्रेड डील से टेक्सटाइल, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।
किसानों और किसान संगठनों का विरोध
किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है।
देशभर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर किसानों से बिना सलाह के समझौता करने का आरोप लगाया।
किसान नेताओं का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू कीमतें गिरेंगी और किसानों की आय प्रभावित होगी।
सरकार का पक्ष: किसानों के हित सुरक्षित
सरकार का कहना है कि इस डील में अधिकांश कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है और आयात की सीमा तय की गई है।
उदाहरण के लिए, DDG आयात को केवल सीमित मात्रा तक ही अनुमति दी गई है, जिससे घरेलू उद्योग सुरक्षित रह सके।
विशेषज्ञों की राय: मिश्रित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेड डील का प्रभाव मिश्रित होगा।
सकारात्मक प्रभाव
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निर्यात में वृद्धि
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विदेशी निवेश में बढ़ोतरी
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कृषि और उद्योग में तकनीकी सुधार
नकारात्मक प्रभाव
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किसानों की आय पर दबाव
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कीमतों में गिरावट
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MSP प्रणाली पर खतरा
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विदेशी उत्पादों पर निर्भरता
राजनीतिक विवाद और पारदर्शिता का मुद्दा
ट्रेड डील ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्ष सरकार से इस समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।
राजनीतिक दलों और किसान संगठनों का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता जरूरी है।
भविष्य के लिए सबसे बड़ा सवाल: आत्मनिर्भर कृषि या वैश्विक प्रतिस्पर्धा?
भारत आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।
एक ओर वैश्विक व्यापार से आर्थिक विकास का अवसर है, तो दूसरी ओर किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भर कृषि का सवाल है।
यह संतुलन बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
संतुलित नीति ही समाधान
भारत-अमेरिका ट्रेड डील न तो पूरी तरह से किसानों के लिए खतरा है और न ही पूरी तरह से अवसर।
इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि:
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सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा कैसे करती है
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MSP और कृषि नीति को कैसे मजबूत किया जाता है
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आयात और निर्यात के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है
यदि सही संतुलन बनाया गया, तो यह डील भारत के लिए अवसर बन सकती है।
लेकिन यदि किसानों के हितों की अनदेखी हुई, तो यह भारतीय कृषि के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है।

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