विश्व रेडियो दिवस 2026: सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में रेडियो की गूंज, यादों और प्रेरणा का अनूठा संगम

 कार्यशाला में आकाशवाणी उज्जैन के उद्घोषकों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों ने जाना रेडियो का महत्व



उज्जैन, 13 फरवरी 2026।
विश्व रेडियो दिवस 2026 के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में रेडियो की मधुर गूंज और स्मृतियों का अनूठा संगम देखने को मिला। सतत शिक्षा अध्ययनशाला, पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला तथा पं. जवाहर लाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को रेडियो के स्वर्णिम इतिहास और समकालीन महत्व से रूबरू कराया।

कार्यक्रम में आकाशवाणी उज्जैन के उद्घोषकों की सहभागिता ने आयोजन को जीवंत बना दिया। पूरा सभागार रेडियो से जुड़ी यादों, अनुभवों और प्रेरणादायी प्रसंगों से सराबोर नजर आया।




🎙️ रेडियो: केवल मनोरंजन नहीं, करियर और ज्ञान का सशक्त माध्यम

कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं पं. जवाहर लाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के निदेशक प्रो. धर्मेंद्र मेहता ने अपने उद्बोधन में कहा कि रेडियो केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह करियर निर्माण, रोजगार सूचना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी माध्यम है।

उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे नियमित रूप से “रोजगार समाचार” और “युवा वाणी” जैसे कार्यक्रम सुनते थे। मौसम समाचार, खेल कमेंट्री और अंग्रेजी बुलेटिन से उनकी भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे मोबाइल फोन का सकारात्मक उपयोग करते हुए एफएम रेडियो सुविधा का लाभ उठाएं। उनके अनुसार रेडियो सुनने से एकाग्रता और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होती है।



📻 रेडियो ने गांव-गांव तक पहुंचाई सूचना

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सतत शिक्षा अध्ययनशाला के प्रभारी संचालक डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि संचार क्रांति का विस्तार विश्व युद्धों के दौर से हुआ और रेडियो ने इसे जन-जन तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि एक समय घर में रेडियो होना प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। लोग सामूहिक रूप से समाचार सुनते थे। रेडियो ने मनोरंजन के साथ कृषि जानकारी और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समाचार गांव-गांव तक पहुंचाए।

आज मोबाइल तकनीक के माध्यम से रेडियो पुनः जनसामान्य के निकट आ रहा है, जो इसकी प्रासंगिकता को प्रमाणित करता है।




⏰ समयबद्धता और अनुशासन का प्रतीक है रेडियो

विशिष्ट अतिथि प्राध्यापक डॉ. अजय शर्मा ने रेडियो को समयबद्धता और अनुशासन का माध्यम बताया।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रेडियो पर प्रत्येक कार्यक्रम निर्धारित समय पर प्रसारित होता है, उसी प्रकार व्यक्ति को भी अपने जीवन में समय-सारणी का पालन करना चाहिए। रेडियो हमें समय का मूल्य समझाता है और यही इसकी विश्वसनीयता का आधार है।


🎧 विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में आकाशवाणी उज्जैन से जुड़े विद्यार्थी—
सुमित कुमार, अभिषेक जैन, नासिर बेलीम, देशना जैन, दिया उमठ, सारांश देवान, गुनगुन शर्मा सहित अनेक विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।

उद्घोषक के रूप में कार्य कर रहे विद्यार्थियों ने बताया कि रेडियो ने उनके आत्मविश्वास, उच्चारण कौशल और वाक्-कौशल को सशक्त बनाया है।

कार्यक्रम का संचालन खुशबू परमार ने किया तथा आभार प्रदर्शन कुलदीप शर्मा ने किया।



🔎 तकनीकी युग में भी प्रासंगिक है रेडियो

विश्व रेडियो दिवस के इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में भी रेडियो की आवाज उतनी ही प्रभावी और प्रासंगिक है, जितनी पूर्व में थी।

रेडियो आज भी विश्वसनीय सूचना, शिक्षा और प्रेरणा का सशक्त माध्यम बना हुआ है।

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