सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ग्लोबल वीमेंस ब्रेकफास्ट 2026, कुलगुरु बोले– महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी से बनेगा विकसित भारत
उज्जैन | 12 फरवरी 2026

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में रसायन एवं जैव रसायन अध्ययनशाला द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘IUPAC ग्लोबल वीमेंस ब्रेकफास्ट 2026’ के तहत “सुरक्षा, संरक्षा और सततता के लिए रसायन” विषय पर आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपने संदेश में कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी केवल समानता का विषय नहीं, बल्कि देश के विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब महिला शोधकर्ता वैश्विक मंचों पर नई तकनीकों पर काम करती हैं, तभी ‘विकसित भारत@2047’ का सपना साकार होगा।
🔬 विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर जोर
कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने कहा कि आज के समय में रसायन विज्ञान की भूमिका सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्राओं और महिला शोधार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति दुबे रहीं। अध्यक्षता रसायन एवं जैव रसायन अध्ययनशाला की विभागाध्यक्ष डॉ. उमा शर्मा ने की।
डॉ. उमा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा, “विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती। महिलाओं की भागीदारी से ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान संभव है।” उन्होंने सतत रासायनिक प्रक्रियाओं को अपनाने का आह्वान किया।
🌍 देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में देश और विदेश के वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार रखे।
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डॉ. मनीषा साठे (वैज्ञानिक ‘G’, DRDE ग्वालियर) ने “विकसित भारत@2047 के लिए रासायनिक रक्षा प्रौद्योगिकियां” विषय पर कहा कि देश की सुरक्षा के लिए स्वदेशी रासायनिक रक्षा तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।
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डॉ. अंकिता सिन्हा, मेरी क्यूरी फेलो, यूनिवर्सिटी ऑफ रोम (इटली) ने बायोसेंसर तकनीक पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक स्वास्थ्य, पर्यावरण सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने “5R” सिद्धांत— पुनर्विचार, कम करना, पुनः उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण— को अपनाने पर जोर दिया।
🌱 सतत भविष्य और वैज्ञानिक सोच
संगोष्ठी में वायु प्रदूषण, रासायनिक हथियारों के खतरे और खाद्य मिलावट जैसे विषयों पर चर्चा की गई। संयुक्त राष्ट्र के “महिला एवं बालिकाओं का विज्ञान दिवस” के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विज्ञान में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।
विद्यार्थियों को “खेल-खेल में सीखने” की अवधारणा से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
🏆 प्रतियोगिता परिणाम
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पोस्टर: श्रुति शर्मा, लक्षिता सत्तेवाल
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रंगोली: उजाला कुमारी, महक परमार
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निबंध: विष्णु चौहान, दीक्षिता परमार, अलिभा जेना
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क्विज़: हर्षिता बैरागी
शोधार्थियों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें वैश्विक चुनौतियों को समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर देते हैं।
👩🏫 शिक्षकों की सराहनीय भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. दर्शना मेहता, डॉ. अंशुबाला वाणी और डॉ. प्रज्ञा गोयल सहित अध्ययनशाला के प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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