कृषक कल्याण वर्ष-2026: कृषि रथ से किसानों को मिल रही वैज्ञानिक खेती की जानकारी

 भोपाल | 4 फरवरी 2026



प्रदेश में किसानों के सर्वांगीण विकास और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस महाअभियान के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक और जैविक कृषि की जानकारी सीधे उनके गांव तक पहुंचाई जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा बुरहानपुर जिले से इस अभियान की शुरुआत करते हुए “कृषि रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद सत्र में बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।



कृषि रथ: सही मिट्टी, सही फसल, सही तकनीक का संदेश

कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत संचालित कृषि रथ हर ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की जानकारी दे रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादन लागत कम करना और पैदावार बढ़ाना है।

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को निम्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है—

  • जैविक एवं प्राकृतिक खेती

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

  • एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन

  • कीट एवं रोग प्रबंधन

  • फसल विविधीकरण

  • पराली प्रबंधन योजनाएं

  • उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था

  • विभागीय एवं जनकल्याणकारी योजनाएं

विशेष रूप से किसानों को यह समझाया जा रहा है कि मिट्टी की जांच के आधार पर फसल चयन कैसे किया जाए, जिससे कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सके।


पातोंडा, चिंचाला और एमागिर्द में कृषक चौपालों का आयोजन

बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग एवं सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला और एमागिर्द में कृषक चौपालों का आयोजन किया गया।

इन चौपालों में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रमुख आधारों की जानकारी दी गई, जिनमें शामिल हैं—

  • जीवामृत

  • बीजामृत

  • नीमास्त्र

  • ब्रह्मास्त्र

  • दसपर्णी अर्क

इन सभी प्राकृतिक कृषि उपायों को बनाने की विधि भी किसानों को सरल भाषा में समझाई गई।



रासायनिक उर्वरकों से मृदा स्वास्थ्य को हो रहे नुकसान पर चर्चा

कृषक चौपालों में विशेषज्ञों द्वारा रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गई। किसानों को—

  • मिट्टी नमूना लेने की सही विधि

  • संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती

की सलाह दी गई, ताकि भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।


जायद फसलों को बढ़ावा, उड़द और मूंगफली की बुवाई पर जोर

दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जायद फसल उड़द और मूंगफली के महत्व के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने किसानों को इन फसलों की बुवाई के लिए प्रेरित किया, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सके।

साथ ही, पराली प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं और इसके पर्यावरणीय लाभों की जानकारी भी किसानों को दी गई।


ग्राम बाकड़ी में कृषि चौपाल, योजनाओं की मिली पूरी जानकारी

कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत ग्राम बाकड़ी में भी कृषि रथ पहुंचा। यहां विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।

किसानों को बताया गया—

  • जैविक खेती के फायदे

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग

  • कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय

  • फसल विविधीकरण

  • उर्वरकों का संतुलित उपयोग

  • खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के तरीके

कृषि रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।


हर गुरुवार लगेगा “प्राकृतिक हाट बाजार”

बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को उनके प्राकृतिक उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में “प्राकृतिक हाट बाजार” आयोजित किया जा रहा है।

हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने कहा कि—

“प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि इससे किसानों की आय बढ़ती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व पौष्टिक उत्पाद मिलते हैं। अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।”

 


समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश की दिशा में कदम

प्रदेश सरकार के नेतृत्व में कृषक कल्याण वर्ष-2026 के माध्यम से खेती को आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि रथ, कृषक चौपाल और प्राकृतिक हाट बाजार जैसे नवाचार किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

यह पहल निश्चित रूप से “समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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