श्री महाकाल वन मेला 2026 का शुभारंभ: “समृद्ध वन, खुशहाल जन” थीम पर 6 दिवसीय आयोजन, वन उपज को बताया प्रकृति का अमूल्य उपहार
उज्जैन, 11 फरवरी 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वन उपज प्रकृति का अमूल्य उपहार है और उनके औषधीय गुण हमारे जीवन को सरल, सुगम और निरोग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। “समृद्ध वन, खुशहाल जन” की थीम पर 11 से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान, उज्जैन में आयोजित 6 दिवसीय श्री महाकाल वन मेला 2026 के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने भगवान धन्वंतरि का पूजन कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया और कहा कि जहां भगवान श्री महाकाल आरोग्य और मोक्ष के अधिपति हैं, वहीं वन संपदा के माध्यम से आरोग्य का यह भव्य उत्सव आयोजित होना अत्यंत सौभाग्य का विषय है।
वन: स्वास्थ्य और संस्कृति का आधार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन केवल लकड़ी या संसाधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्य के मूल आधार हैं। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि संजीवनी बूटी का उदाहरण हमारे प्राचीन वनौषधीय ज्ञान का प्रमाण है।
आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि से लेकर महर्षि चरक और सुश्रुत तक, भारतीय चिकित्सा पद्धति का आधार वन संपदा ही रही है। च्यवनप्राश, अश्वगंधा, आंवला, हर्रा, बहेड़ा, नीम, गिलोय और अर्जुन जैसी औषधियां आज भी वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में आयुष और आयुर्वेद ने दुनिया को भारतीय चिकित्सा पद्धति की शक्ति का परिचय कराया। आज वैश्विक समुदाय भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की ओर विश्वास के साथ देख रहा है।
250 स्टॉल, 50 आयुर्वेदिक ओपीडी और 100 पारंपरिक वैद्य
वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि उज्जैन में पहली बार आयोजित हो रहे इस मेले में लगभग 250 भव्य स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें—
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76 स्टॉल प्राथमिक लघु वनोपज समितियों एवं वन धन केंद्रों के
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76 स्टॉल निजी उद्यमियों के
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16 स्टॉल शासकीय विभागों की प्रदर्शनी हेतु
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16 स्टॉल वन आधारित फूड ज़ोन
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50 स्टॉल निःशुल्क आयुर्वेदिक ओपीडी के
मेले में 50 आयुर्वेदिक डॉक्टर और 100 पारंपरिक वैद्य सेवाएं दे रहे हैं। यहां दोना-पत्तल निर्माण, शहद, लाख, कोदो-कुटकी, सबई रस्सी जैसे उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।
महुआ से लेकर साल बीज तक—वन उत्पादों की विविधता
मेले में महुआ फूल, महुआ गुल्ली, साल बीज, अचार गुठली, आंवला, जामुन, बेल फल, चकोंडा बीज जैसे प्रमुख उत्पाद उपलब्ध हैं। फूड ज़ोन में बांधवगढ़ के गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा की वन भोज रसोई और अलीराजपुर का पारंपरिक दाल-पानिया विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने वन मेले में उपलब्ध हर्बल पूजन सामग्री और औषधीय उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण का मंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने और वैज्ञानिक आधार देने के लिए बालाघाट में वनौषधि अनुसंधान केंद्र स्थापित कर चुकी है। देवारण्य योजना के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती और वन संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह वन मेला जनजातीय समाज के परिश्रम, परंपरागत ज्ञान और आधुनिक बाजार के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। इससे वन उत्पादों को उचित बाजार और वनवासियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
कृषक कल्याण वर्ष में वन उत्पादकों को भी लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका लाभ किसानों के साथ-साथ वनोपज उत्पादक जनजातीय भाई-बहनों को भी मिलेगा। वन मेला उनके उत्पादों के विपणन का प्रभावी मंच बना है।
सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में वन रक्षक श्री जगदीश प्रसाद अहिरवार को जड़ी-बूटी विषयक पुस्तक लेखन के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में भी उनका उल्लेख किया था।
इस अवसर पर लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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