विक्रमोत्सव 2026 उज्जैन: 15 फरवरी से भव्य शुभारंभ, प्रीतम की ‘शिवोऽहम’ प्रस्तुति और 41 से अधिक आयोजन
उज्जैन | 12 फरवरी 2026
धर्म, दर्शन और संस्कृति की वैश्विक पहचान बन चुकी उज्जयिनी एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। 15 फरवरी से प्रारंभ होने वाला विक्रमोत्सव 2026 इस बार केवल उत्सव नहीं, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य की वैचारिक विरासत और विक्रम सम्वत की गौरवगाथा का विराट सांस्कृतिक अभियान बनेगा।
संभागायुक्त श्री आशीष सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप आयोजन को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर की गरिमा प्रदान की जाए। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, संस्कृति विभाग, स्वराज संस्थान संचालनालय और जिला प्रशासन मिलकर इस ऐतिहासिक आयोजन को मूर्त रूप देंगे।
🔱 15 फरवरी: आध्यात्मिक आह्वान और सांगीतिक आराधना
विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को प्रातः 10 बजे भव्य कलश यात्रा से होगा। शाम 7:30 बजे पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा ‘शिवोऽहम’ की प्रस्तुति उज्जयिनी की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊँचाई देगी।
इस वर्ष महोत्सव में 41 से अधिक प्रमुख आयोजन और 4 हजार से अधिक कलाकारों की सहभागिता इसे अब तक का सबसे व्यापक आयोजन बना रही है।
🌿 महाकाल वन मेला: परंपरा और आयुर्वेद का संगम (12–16 फरवरी)
दशहरा मैदान पर आयोजित महाकाल वन मेले में—
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हर्बल उत्पादों का प्रदर्शन
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आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण
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पारंपरिक ज्ञान पर आधारित नवाचार
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हर्बल उत्पादों के लिए एमओयू
यह मेला “वोकल फॉर लोकल” और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को नई दिशा देगा।
🖼️ सांस्कृतिक विरासत की 7 भव्य प्रदर्शनियां (15 फरवरी–19 मार्च)
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में आयोजित प्रदर्शनियों में—
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सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या
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आर्ष भारत
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महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र
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84 महादेव
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जनजातीय देवलोक
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श्रीकृष्ण प्रभात
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रागमाला
इन प्रदर्शनियों के माध्यम से प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि को जीवंत किया जाएगा।
🛍️ विक्रम व्यापार मेला: परंपरा से आधुनिकता तक (15 फरवरी–19 मार्च)
इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में आयोजित व्यापार मेले में—
वाहन स्टॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैंकिंग सुविधा, हथकरघा-टेक्सटाइल, देशज व्यंजन और ग्रामीण शिल्प एक ही मंच पर उपलब्ध होंगे। MSME और ग्रामोद्योग विभाग की भागीदारी से स्थानीय उद्यमियों को बड़ा मंच मिलेगा।
🎭 कला, साहित्य और चिंतन का विराट संगम
🎬 विक्रम नाट्य समारोह (16–25 फरवरी)
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘अंधायुग’, ‘जटायुवधम्’ सहित अनेक क्लासिक प्रस्तुतियां।
📚 इतिहास समागम (26–28 फरवरी)
वृहत्तर भारत में संस्कृति और पुरातत्व पर राष्ट्रीय विमर्श।
🌍 अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठियां (28 फरवरी–2 मार्च, 12–14 मार्च)
मंदिर संस्कृति और भारतीय ज्योतिष पर गहन अकादमिक चर्चा।
🎥 अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव (13–17 मार्च)
25 से अधिक भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन, जो भारत की पौराणिक परंपरा को वैश्विक दृष्टि देगा।
🎤 कवि सम्मेलन और नारी शक्ति मंच
7 मार्च को अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन तथा 14 मार्च को जनजातीय भाषा-कवि सम्मेलन सांस्कृतिक विविधता का उत्सव बनेंगे।
19 मार्च: गौरव का शिखर — सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण
रामघाट पर प्रातः 5:30 बजे कोटि सूर्योपासना से दिन की शुरुआत होगी।
शाम 7 बजे शिप्रा तट पर अलंकरण समारोह में—
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अंतरराष्ट्रीय सम्मान: ₹1,01,00,000
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राष्ट्रीय सम्मान: ₹21,00,000
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राज्यस्तरीय सम्मान: ₹5,00,000
साथ ही सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक विशाल मिश्रा की प्रस्तुति, ड्रोन शो और आतिशबाजी इस क्षण को ऐतिहासिक बनाएंगे।
जल गंगा संवर्धन अभियान: संस्कृति से संवर्धन तक (19 मार्च–30 जून)
विक्रमोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जल संरक्षण का सामाजिक अभियान भी है। प्रदेशभर में जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनका समापन 30 जून को होगा।
किसान कल्याण और अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन
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19–22 अप्रैल: किसान स्वाभिमान कृषि मेला
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23–24 मई: भोपाल में अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन
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05 मई: गंगा दशहरा पर विशेष आयोजन
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30 मई–07 जून: सदानीरा समागम
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