उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026: 12 फरवरी से 139 दिवसीय भव्य आयोजन,

 महाशिवरात्रि पर संगीतकार प्रीतम करेंगे महादेव की आराधना



उज्जैन/भोपाल, 7 फरवरी 2026। धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित होने जा रही है। सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान महादेव की आराधना से प्रारंभ होकर जल संरक्षण के संकल्प तक विस्तारित 139 दिवसीय विक्रमोत्सव-2026 का भव्य आयोजन 12 फरवरी से शुरू होगा। इस महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर होगा, जिसमें सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम “शिवोऽहम” की स्वरांजलि से महादेव की आराधना करेंगे।

अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं धार्मिक न्यास विभाग श्री शिव शेखर शुक्ला ने भोपाल स्थित एमपीटी लेक व्यू रेजिडेंसी में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक चलेगा और सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों का देश-दुनिया में अनूठा उदाहरण बनेगा।


महाशिवरात्रि से होगा भव्य शुभारंभ

विक्रमोत्सव का प्रथम चरण 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर आरंभ होगा। इस अवसर पर संगीतकार प्रीतम की विशेष प्रस्तुति “शिवोऽहम” के माध्यम से भगवान शिव की कलात्मक आराधना की जाएगी। प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलों का आयोजन, मंदिरों की साज-सज्जा और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पर्व को विशेष बनाएंगे।


12 फरवरी से महाकाल वन मेला

उज्जैन के दशहरा मैदान में 12 से 16 फरवरी तक महाकाल वन मेला आयोजित किया जाएगा। इसमें हर्बल उत्पादों, पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और जैविक जीवनशैली पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगा।


जल गंगा संवर्धन अभियान: दूसरा चरण

विक्रमोत्सव का दूसरा चरण 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत जल संरक्षण और संवर्धन पर विशेष गतिविधियाँ आयोजित होंगी। पंचमहाभूतों में ‘जल तत्व’ को केंद्र में रखकर जागरूकता, जनभागीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

इस अवधि में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4,000 से अधिक कलाकार भाग लेंगे।


देश का सबसे बड़ा सम्मान: सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण

विक्रमोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा 1 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि वाला “सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण”। इसके अतिरिक्त 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी स्थापित किए गए हैं। यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति, शौर्य, न्यायप्रियता और प्रजावत्सलता के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।


सांस्कृतिक गतिविधियों की लंबी श्रृंखला

139 दिवसीय इस महोत्सव में शिवरात्रि मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत-नृत्य-वादन कार्यक्रम, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समारोह, पुतुल (कठपुतली) समारोह, अनहद वैचारिक समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, ड्रोन शो, विशाल मिश्रा की प्रस्तुति और भारतीय कालगणना पर आधारित विक्रम पंचांग का लोकार्पण जैसे आयोजन शामिल हैं।


विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रस्तुतियाँ

दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की चर्चित प्रस्तुतियाँ— जटायुवधम्, चारूदत्तम, भरतवाक्य, जाति जीवनम्, अभिज्ञान शाकुन्तलम्, चतुर्भाणी— के साथ अंधायुग, भूमि सूर्य वीरगाथा, आदि-अनंत, अभंग नाद आदि नाटकों का मंचन होगा।


पुतुल समारोह और कवि सम्मेलन

25 से 28 फरवरी तक पुतुल समारोह में देश की छह प्रमुख कठपुतली शैलियों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य, भीम-बकासुर और दुर्योधन वध जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।

1 मार्च को जनजातीय भाषा एवं बोलियों का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन आयोजित होगा। 14 मार्च को देश के दस सुप्रसिद्ध कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे।


अंतर्राष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव

13 से 17 मार्च 2026 तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव में 25 से अधिक देशों की फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। अंग्रेजी, फ्रेंच, हिब्रू, रूसी, स्पेनिश, इटेलियन, डच, मंगोलियन, इंडोनेशियन सहित कई भाषाओं की पौराणिक फिल्मों का प्रदर्शन होगा। महाभारत पर आधारित विशेष फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।


पौराणिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनियाँ

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में सात प्रमुख प्रदर्शनियाँ आयोजित होंगी, जिनमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक और रागमाला प्रमुख हैं।


आर्थिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन

विक्रमोत्सव-2026 न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की आमद से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।


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