श्री महाकाल की नगरी अवंतिका में विदेशी पक्षियों का डेरा
एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2026: उज्जैन के तालाबों में 67 पक्षी प्रजातियां दर्ज
उज्जैन | गुरुवार, 9 जनवरी 2026
श्री महाकाल की नगरी अवंतिका एक बार फिर अपनी प्राकृतिक समृद्धि और जैव विविधता के कारण चर्चा में है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस (Asian Waterbird Census – AWC) 2026 के अंतर्गत उज्जैन जिले के विभिन्न तालाबों और जलाशयों में 67 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें कई विदेशी और प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि उज्जैन अब केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पक्षी पर्यटन और जैव विविधता संरक्षण का भी प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
उज्जैन के जैव विविधता इतिहास का स्वर्णिम पल
जिला वनमंडलाधिकारी श्री अनुराग तिवारी ने इस उपलब्धि को उज्जैन के जैव विविधता इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि—
“एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2026 के दौरान उज्जैन के तालाबों में दर्ज की गई पक्षी प्रजातियां यह दर्शाती हैं कि जिले के जलस्रोत आज भी पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल हैं। यह संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।”
3–4 जनवरी को हुआ व्यापक पक्षी सर्वेक्षण
जानकारी के अनुसार, 3 और 4 जनवरी 2026 को उज्जैन जिले के प्रमुख तालाबों और जलाशयों में यह सर्वेक्षण किया गया। इस कार्य में 17 अनुभवी बर्डवॉचर्स (पक्षी प्रेमियों) की टीम ने भाग लिया। टीम ने अलग-अलग समूहों में विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर पक्षियों की गणना और पहचान की।
इन तालाबों में हुआ पक्षी सर्वे
एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत उज्जैन जिले के निम्न प्रमुख जलस्रोतों को शामिल किया गया—
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उंडासा तालाब
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सिलारखेड़ी तालाब
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पुरुषोत्तम सागर तालाब
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उज्जैन रोड क्षेत्र के जलाशय
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गोगापुर क्षेत्र के तालाब
इन सभी स्थानों पर पक्षियों की उल्लेखनीय संख्या और विविधता दर्ज की गई।
सर्वे में दर्ज प्रमुख पक्षी प्रजातियां
सर्वेक्षण के दौरान जिन प्रमुख पक्षी प्रजातियों को देखा गया, उनमें शामिल हैं—
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ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट
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लेसर व्हिसलिंग डक
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इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक
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नॉर्दर्न शोवेलर
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सारस क्रेन
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यूरेशियन कूट (कूट)
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मोहन ग्रेन्स (मूरहेन)
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लिटिल रिंग्ड प्लोवर
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कॉमन सैंडपाइपर
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वुड सैंडपाइपर
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साइबेरियन स्टोनचैट
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सिट्रीन वैगटेल
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व्हाइट वैगटेल
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ग्रे वैगटेल
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पाइड बुशचैट
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रूफस-टेल्ड लार्क
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प्लेन प्रिनिया
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लिटिल स्विफ्ट
इनमें कई प्रजातियां मध्य एशिया, साइबेरिया और यूरोपीय क्षेत्रों से आने वाली प्रवासी पक्षी हैं, जो सर्दियों में भारत का रुख करती हैं।
कोहरे के बावजूद उत्साहजनक परिणाम
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वेक्षण के दिनों में कोहरे और ठंड की स्थिति के बावजूद 67 प्रजातियों का दर्ज होना यह दर्शाता है कि—
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उज्जैन के जलस्रोत पक्षियों के लिए सुरक्षित हैं
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भोजन और आवास की पर्याप्त उपलब्धता है
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क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की अपार संभावनाएं हैं
यह आंकड़े भविष्य में संरक्षण योजनाओं, इको-टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होंगे।
पक्षी पर्यटन की संभावनाएं बढ़ीं
एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2026 के परिणामों से यह स्पष्ट है कि उज्जैन में बर्ड टूरिज्म को विकसित किया जा सकता है। यदि तालाबों का संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जन-जागरूकता को और मजबूत किया जाए, तो उज्जैन देश-विदेश के पक्षी प्रेमियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बन सकता है।
निष्कर्ष
श्री महाकाल की नगरी अवंतिका में विदेशी और देशी पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी न केवल प्राकृतिक संतुलन का संकेत है, बल्कि यह उज्जैन के लिए गर्व का विषय भी है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2026 ने यह साबित कर दिया है कि उज्जैन धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक वैभव का भी अद्भुत संगम है।

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