युवाओं की सहभागिता से बनेगा नया मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में राज्य स्तरीय युवा उत्सव का शुभारंभ
नई शिक्षा नीति से युवाओं को नए अवसर
सांस्कृतिक शोभायात्रा में दिखी प्रदेश की विविधता
उज्जैन | गुरुवार, 8 जनवरी 2026 |
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही नया, सशक्त और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश बनेगा। उन्होंने यह बात उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय युवा उत्सव ‘अभ्युदय’ के वर्चुअल शुभारंभ अवसर पर कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा केवल कार्यक्रमों का सहभागी नहीं है, बल्कि वह भविष्य के मध्य प्रदेश का मजबूत साझेदार है। नई सोच, नई ऊर्जा और नए संकल्पों के साथ प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
भारत दुनिया का सबसे युवा देश: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश होने के साथ-साथ तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्य प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे अहम है।
उन्होंने कहा कि दशकों से प्रतीक्षित नई शिक्षा नीति देश को मिली है और मध्य प्रदेश इसे पूरी सक्रियता से लागू करने वाला पहला राज्य है। वर्ष 2020 से लागू नई शिक्षा नीति के कारण कौशल विकास, स्टार्टअप, स्वरोजगार और नवाचार को नई दिशा मिली है।
8.30 लाख करोड़ के निवेश से बढ़े रोजगार अवसर
मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योग और रोजगार वर्ष के तहत प्रदेश में इस वर्ष लगभग 8.30 लाख करोड़ रुपए के भूमि-पूजन और लोकार्पण हुए हैं। इससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि के बाद टेक्सटाइल उद्योग सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र बन रहा है। कपास से लेकर धागा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स तक का पूरा उत्पादन तंत्र मध्य प्रदेश में विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों, कारीगरों और उद्योगों को लाभ मिलेगा।
2047 के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाना है, और इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आग्रह किया कि उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किए जाएं, ताकि पढ़ाई के साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
उन्होंने कुलगुरुओं से कहा कि विश्वविद्यालयों में स्किल-आधारित और प्रोफेशनल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं, जो सीधे उद्योगों से जुड़े हों।
उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन का संकल्प
उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार
राज्य स्तरीय युवा उत्सव के उद्घाटन सत्र में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में बुनियादी और ऐतिहासिक परिवर्तन कर रही है।
उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय में एक अत्याधुनिक खेल स्टेडियम विकसित किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक फंड की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
थ्योरी-प्रैक्टिकल का अनुपात अब 50:50
मंत्री श्री परमार ने बताया कि अब तक चली आ रही 70:30 (थ्योरी-प्रैक्टिकल) परीक्षा प्रणाली को बदलकर 50:50 कर दिया गया है। इससे विद्यार्थी व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग और स्वरोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से अब भारत के प्राचीन गणित, विज्ञान और आयुर्वेदिक ज्ञान को भी पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
नई भाषाएं और नए कौशल होंगे शामिल
उच्च शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में 13 भारतीय भाषाओं—तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, असमिया, उड़िया, तेलुगु, सिंधी और मणिपुरी—को पढ़ाया जाएगा। इसे क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे राष्ट्रीय एकता और भाषाई समन्वय मजबूत होगा।
साथ ही आगामी युवा उत्सवों में कोरियोग्राफी, मेहंदी, वीडियोग्राफी जैसे डिजिटल और रचनात्मक कौशल भी जोड़े जाएंगे।
भारतीय परंपरा ही हमारी वास्तविक पहचान: बालयोगी उमेशनाथ जी
राज्यसभा सांसद बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है। माता के संस्कार, गुरु की दीक्षा और भारतीय परंपरा ही व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी पहचान और सुरक्षा का कवच है।
सांस्कृतिक शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
युवा उत्सव के शुभारंभ के बाद विश्वविद्यालय परिसर से टावर चौक तक भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं अपने ध्वजों के साथ शामिल हुए। जनजातीय कला, लोक नृत्य, झांकियां और देवी-देवताओं के स्वरूपों ने मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को जीवंत कर दिया।

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