उज्जैन में शिवमय होगा गुरुवार, ‘शिवा’ बनेगा महाकाल महोत्सव का मुख्य आकर्षण

 शिव, स्वर और संस्कृति का अद्भुत संगम : महाकाल महोत्सव 2026

उज्जैन | बुधवार, 14 जनवरी 2026 



भगवान श्री महाकालेश्वर की पावन नगरी उज्जैन गुरुवार को शिवमय वातावरण में डूब जाएगी। श्री महाकाल महोत्सव 2026 के दूसरे दिन, गुरुवार 15 जनवरी को श्री महाकाल लोक में शिव तत्त्व पर आधारित भव्य सांगीतिक प्रस्तुति “शिवा” आयोजित की जाएगी, जो महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी।

सायं 7 बजे से शुरू होने वाली इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में देश का प्रतिष्ठित संगीत समूह द ग्रेट इंडियन कॉयर (मुंबई) भगवान शिव की भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना को सुरों में पिरोकर प्रस्तुत करेगा। यह प्रस्तुति संगीत और शिव अनुभूति का अनुपम संगम होगी।


14 से 18 जनवरी तक चलेगा श्री महाकाल महोत्सव 2026

वीर भारत न्यास, विक्रमादित्य शोध पीठ और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव 14 से 18 जनवरी 2026 (विक्रम संवत 2082) तक चलेगा। महोत्सव के दौरान श्री महाकाल लोक और त्रिवेणी संग्रहालय में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और लोक कलात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस महोत्सव का उद्देश्य भगवान शिव के तत्त्व, महाकाल की अवधारणा और भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं लोक परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाना है।


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : शिव तत्त्व और महाकाल

महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।

  • विषय: “शिव तत्त्व और महाकाल : पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में”

  • स्थान: त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन

  • समय: प्रातः 10:30 बजे

संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान शिव परंपरा के दार्शनिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पक्षों पर अपने शोधपूर्ण विचार प्रस्तुत करेंगे।


जनजातीय और लोक नृत्यों की जीवंत प्रस्तुतियाँ

महोत्सव में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विशेष मंच प्रदान किया जा रहा है। गुरुवार को—

  • गोंड जनजातीय गुडुम बाजा – अशोक कुमार मार्कों एवं साथी (डिंडोरी)

  • बैगा जनजातीय करमा नृत्य – दयाराम एवं साथी (डिंडोरी)

  • बेरेडी नृत्य – मनीष यादव एवं साथी (सागर)

  • भील जनजातीय भगोरिया नृत्य – मनीष सिसोदिया एवं साथी (धार)

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक जीवन, परंपरा और आस्था की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।

 



कला यात्रा और डमरू वादन

कला यात्रा के अंतर्गत डमरू वादन दल – मुकेश शास्त्री एवं साथी (उज्जैन) द्वारा विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।

  • मार्ग: रामघाट – हरसिद्धि पथ – बड़ा गणेश – महाकाल लोक

  • समय: अपरान्ह 4 बजे

यह यात्रा पूरे शहर में शिव भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देगी।


विशेष सांस्कृतिक संध्या : “शिवा”

गुरुवार 15 जनवरी, सायं 7 बजे, श्री महाकाल लोक में “शिवा” विषय पर आधारित भव्य सांगीतिक प्रस्तुति होगी।
द ग्रेट इंडियन कॉयर (मुंबई) द्वारा प्रस्तुत यह कार्यक्रम भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम होगा, जो दर्शकों को शिव तत्व से जोड़ देगा।


सांस्कृतिक चेतना का उत्सव

वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि श्री महाकाल महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय चेतना, शिव दर्शन और लोक परंपराओं का जीवंत उत्सव है। यह महोत्सव उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करेगा।

उन्होंने नगर के श्रद्धालुओं, संस्कृति प्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों से महोत्सव में अधिक से अधिक सहभागिता करने का आह्वान किया है।




उज्जैन बनेगा शिव भक्ति और संस्कृति का केंद्र

श्री महाकाल महोत्सव 2026 के माध्यम से उज्जैन एक बार फिर शिव भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनकर उभरेगा। यह महोत्सव श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा।

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