ग्राम पुरी खेड़ा में ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद
किसानों ने फसल काटकर दिखाया नुकसान, सर्वे कर मुआवजे की मांग
उज्जैन जिले की घटिया तहसील क्षेत्र के ग्राम पुरी खेड़ा में बीते दिनों हुई अचानक ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर कहर बरपा दिया। खेतों में लहलहा रही गेहूं, चना, मसूर सहित अन्य रबी फसलें ओलों की मार से पूरी तरह नष्ट हो गईं। जिन फसलों से किसान अपने परिवार की सालभर की जरूरतें और कर्ज चुकाने की उम्मीद लगाए बैठे थे, वे अब जमीन पर बिछी पड़ी हैं।
ओलावृष्टि के बाद गांव के किसानों ने मौके पर पहुंचकर खराब हो चुकी फसल को काटकर प्रशासन के सामने रखा, ताकि नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। किसानों का कहना है कि खेतों में फसल बचने लायक नहीं रही और कटाई के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
ग्रामीण किसानों ने मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की है कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनी की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल सर्वे कराया जाए और फसल नुकसान का सही आकलन कर शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
किसानों की ओर से जितेंद्र गरासिया ने बताया कि ग्राम पुरी खेड़ा में बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है।
“किसानों ने बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए थे। अब फसल चौपट हो गई है। यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला तो किसान कर्ज के जाल में फंस जाएंगे,” उन्होंने कहा।
किसानों ने यह भी बताया कि कई खेतों में फसल 80 से 100 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हुई है। ओलों के साथ तेज हवा और बारिश के कारण बालियां टूट गईं और दाने खेतों में बिखर गए। इससे उत्पादन शून्य के करीब पहुंच गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन राहत और मुआवजा समय पर नहीं मिलता। कई किसानों की फसल बीमा योजना में दर्ज है, फिर भी बीमा क्लेम की प्रक्रिया लंबी और जटिल बनी हुई है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र को आपदा प्रभावित घोषित किया जाए, सर्वे में पारदर्शिता रखी जाए और मुआवजा राशि सीधे किसानों के खातों में शीघ्र जमा की जाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।
ग्रामीण किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सर्वे और मुआवजा नहीं दिया गया तो वे तहसील कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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