सत्य, धर्म और पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति की आत्मा : राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल

 महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर का पाँचवां दीक्षांत समारोह संपन्न



भोपाल | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सत्य, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने जीवन और आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें।

राज्यपाल श्री पटेल वसंत पंचमी के पावन अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को पीएचडी उपाधियाँ, स्वर्ण पदक और विभिन्न शैक्षणिक उपाधियाँ प्रदान कीं। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।


उपाधियाँ समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह में प्राप्त उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जीवन की नई चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास, निरंतर सीखने की भावना और सकारात्मक सोच के साथ करें।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। युवा अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने में सक्रिय योगदान दें।


शिक्षा का लक्ष्य नौकरी पाना ही नहीं, नौकरी देना भी हो

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज भी जीवन मूल्यों की पहली पाठशाला होते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान ही सच्ची सफलता

राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने जीवन में आगे बढ़ते समय माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन को कभी न भूलें। उनका सम्मान करना ही सच्ची सफलता की पहचान है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक का व्यक्तित्व विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाला होता है। शिक्षक का कार्य तभी सार्थक है, जब समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे।




दीक्षांत समारोह की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 19 विद्यार्थियों को पीएचडी उपाधि

  • 46 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक

  • लगभग 200 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियाँ

  • माँ सरस्वती और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन

  • स्मारिका “दीक्षावाणी” का लोकार्पण

  • विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण


अतिथियों के विचार

वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वे शोध और नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान दें।

सारस्वत अतिथि एवं मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेम सिंह डहेरिया ने कहा कि कठोर अनुशासन, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता जीवन में सफलता की मजबूत आधारशिला हैं।

कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा उपाधि धारकों को शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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