सौर ऊर्जा के बढ़ते क्षेत्र से पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता घट रही :

 भोपाल | रविवार, 18 जनवरी 2026 भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा के तीव्र विकास के कारण पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता लगातार कम हो रही है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही है।



मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य और 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है, उसे प्राप्त करने में मध्यप्रदेश पूरी प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 14 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब कुल ऊर्जा उत्पादन में इसकी भागीदारी 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

रीवा सोलर पार्क और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट बना पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि गत वर्ष भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया था। वर्तमान में राज्य की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 31 हजार मेगावाट है, जिसमें से 30 प्रतिशत हरित ऊर्जा है।
रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट का उल्लेख राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है, जिससे राज्य को अक्षय ऊर्जा के मानचित्र पर नई पहचान मिली है।

टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इस नीति के तहत सौर और पवन ऊर्जा में निवेश के लिए निवेशकों को लचीले और अनुकूल अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता उसे देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में शामिल करती है।

2030 तक 20 गीगावाट नवकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

मध्यप्रदेश तेजी से हरित ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य में 5 बड़ी सौर परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 20 गीगावाट तक बढ़ाने की है।

नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की संभावना है, जिससे 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं राज्य सरकार 5.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे लगभग 1.46 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल भारत के नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य 2070 को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगी। मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ ऊर्जा मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

प्रश्न–उत्तर : सौर ऊर्जा और मध्यप्रदेश

प्रश्न 1. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौर ऊर्जा को लेकर क्या कहा है?

उत्तर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सौर ऊर्जा के तेजी से विस्तार के कारण मध्यप्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता लगातार कम हो रही है और राज्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।


प्रश्न 2. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्षय ऊर्जा को लेकर क्या लक्ष्य निर्धारित किया है?

उत्तर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन और वर्ष 2070 तक भारत को नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।


प्रश्न 3. मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी है?

उत्तर: मध्यप्रदेश की वर्तमान कुल विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 31 हजार मेगावाट है, जिसमें करीब 30 प्रतिशत हिस्सा हरित और नवकरणीय ऊर्जा का है।


प्रश्न 4. मध्यप्रदेश की प्रमुख सौर ऊर्जा परियोजनाएँ कौन-सी हैं?

उत्तर: मध्यप्रदेश की प्रमुख सौर परियोजनाओं में रीवा सोलर पार्क और देश का सबसे बड़ा ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।


प्रश्न 5. टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी क्या है?

उत्तर: यह नीति सौर और पवन ऊर्जा सहित सभी नवकरणीय तकनीकों को समान अवसर देती है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने इस प्रकार की नीति लागू की है।


प्रश्न 6. वर्ष 2030 तक मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा को लेकर क्या लक्ष्य तय किया है?

उत्तर: मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) करने का लक्ष्य तय किया है।


प्रश्न 7. नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से कितने रोजगार सृजित होंगे?

उत्तर: नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश से लगभग 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।


प्रश्न 8. नवकरणीय ऊर्जा में निवेश से राज्य को क्या लाभ होगा?

उत्तर: इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण होगा, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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