उज्जैन में उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था शुरू, किसानों को मिलेगी पारदर्शी और समयबद्ध सुविधा
उज्जैन | 15 जनवरी 2026
जिले में किसानों को उर्वरक वितरण को सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से आज से ई-टोकन आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली प्रारंभ कर दी गई है। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश शासन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग भोपाल के निर्देशानुसार लागू की गई है।
नई प्रणाली के तहत अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत ई-टोकन जारी किया जाएगा। इससे उर्वरक वितरण में अव्यवस्था, भीड़ और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
कैसे मिलेगा ई-टोकन? जानिए पूरी प्रक्रिया
किसान भाई etoken.mpkrishi.org वेबसाइट पर जाकर अपने आधार कार्ड के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।
पंजीयन के बाद ओटीपी सत्यापन किया जाएगा। इसके पश्चात एग्री स्टेक से प्राप्त भू-अभिलेख के आधार पर किसान अपनी भूमि, बोए गए रकबे के अनुसार उर्वरक की मात्रा और विक्रेता का चयन कर सकेंगे।
सभी जानकारी सत्यापित होने के बाद किसान को एक ई-टोकन जारी किया जाएगा, जिसमें—
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किसान की भूमि का विवरण
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बोई गई फसल
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अनुमन्य उर्वरक की मात्रा
स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होगी।
उर्वरक लेते समय किसान को यह टोकन संबंधित विक्रेता को दिखाना होगा। विक्रेता क्यूआर कोड स्कैन कर निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराएगा।
पूरी तरह डिजिटल प्रणाली, किसानों के लिए बड़ी राहत
यह संपूर्ण व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल है, जिससे न केवल किसानों को समय पर उर्वरक मिलेगा बल्कि सरकारी संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यह पहल डिजिटल कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एग्री स्टेक पर सर्वे/खसरा अपलोड कराना जरूरी
किसानों से अपील की गई है कि वे अपनी भूमि के सभी सर्वे एवं खसरा नंबर एग्री स्टेक पर अपलोड कराएं।
यदि किसी किसान को अपलोड करने में समस्या आ रही हो तो वे अपने संबंधित पटवारी से संपर्क कर यह कार्य पूर्ण कराएं, ताकि उर्वरक प्राप्त करने में कोई बाधा न आए।
समस्या होने पर यहां लें मदद
यदि ई-टोकन बुकिंग में किसी प्रकार की कठिनाई आती है तो किसान—
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अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी
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विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय
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जिला स्तर पर उप संचालक कृषि कार्यालय में नियुक्त नोडल अधिकारी श्री कमलेश कुमार राठौर
से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा जिले में संचालित कृषि रथ के माध्यम से भी किसानों को ई-टोकन बनाने की जानकारी दी जा रही है।
बडनगर के बीरगोधा रणधीर में हुआ ई-टोकन से वितरण
ई-टोकन व्यवस्था के तहत विकासखंड बडनगर के ग्राम बीरगोधा रणधीर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसानों को ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक का वितरण किया गया।
उर्वरक विक्रेताओं से भी अपील
जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं से अनुरोध किया गया है कि जो किसान टोकन बनाने में असमर्थ हैं, उन्हें सहयोग प्रदान करें और केवल ई-टोकन के माध्यम से ही उर्वरक वितरण सुनिश्चित करें।
FAQ – उर्वरक वितरण ई-टोकन प्रणाली (उज्जैन जिला)
Q1. ई-टोकन उर्वरक प्रणाली क्या है?
उत्तर:
ई-टोकन उर्वरक प्रणाली एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसके तहत किसानों को उनकी भूमि और फसल के अनुसार निर्धारित मात्रा में उर्वरक ई-टोकन के माध्यम से दिया जाता है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसानों को समय पर उर्वरक मिलता है।
Q2. किसान ई-टोकन कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
किसान etoken.mpkrishi.org वेबसाइट पर जाकर आधार कार्ड से पंजीयन कर सकते हैं। ओटीपी सत्यापन के बाद भूमि विवरण और रकबे के अनुसार ई-टोकन जारी किया जाता है।
Q3. ई-टोकन में कौन-कौन सी जानकारी होती है?
उत्तर:
ई-टोकन में किसान का नाम, आधार विवरण, भूमि का रकबा, बोई गई फसल और अनुमन्य उर्वरक की मात्रा दर्ज रहती है, जिसे विक्रेता क्यूआर कोड स्कैन कर सत्यापित करता है।
Q4. उर्वरक लेते समय किसान को क्या करना होगा?
उत्तर:
किसान को उर्वरक विक्रेता को अपना ई-टोकन दिखाना होगा। विक्रेता क्यूआर कोड स्कैन कर टोकन के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराएगा।
Q5. यदि एग्री स्टेक पर सर्वे/खसरा नंबर अपलोड नहीं है तो क्या करें?
उत्तर:
ऐसी स्थिति में किसान अपने संबंधित पटवारी से संपर्क कर सर्वे एवं खसरा नंबर एग्री स्टेक पर अपलोड करवा सकते हैं।
Q6. ई-टोकन बनवाने में समस्या आने पर कहां संपर्क करें?
उत्तर:
किसान अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी, विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय या जिला स्तर पर उप संचालक कृषि कार्यालय में नोडल अधिकारी श्री कमलेश कुमार राठौर से संपर्क कर सकते हैं।
Q7. क्या बिना ई-टोकन के उर्वरक मिलेगा?
उत्तर:
नहीं, जिले में उर्वरक वितरण केवल ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही किया जा रहा है।
Q8. ई-टोकन प्रणाली से किसानों को क्या लाभ होगा?
उत्तर:
इस प्रणाली से किसानों को सही समय पर सही मात्रा में उर्वरक मिलेगा, भीड़ और अव्यवस्था कम होगी और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी।

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