नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार एना रॉय ने ली उज्जैन विकास पर अहम बैठक

 उज्जैन को स्वतंत्र विकसित शहर बनाने पर जोर, अर्बन प्लानिंग और निवेश को बताया जरूरी



उज्जैन | रविवार, 11 जनवरी 2026

भारत सरकार के नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार सुश्री एना रॉय ने रविवार को उज्जैन क्षेत्र के विकास और नीति निर्धारण को लेकर प्रशासनिक संकुल भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में उज्जैन को विकास केंद्र (Development Hub) के रूप में स्थापित करने, शहरी विकास, उद्योग, पर्यटन और रोजगार सृजन पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट, एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री राजेश राठौर, सीईओ स्मार्ट सिटी श्री संदीप शिवा, नीति आयोग के ईडी श्री अभिलेश बाबेल सहित आयोग के अधिकारी और जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


उज्जैन के विकास के लिए बदलेगा दृष्टिकोण – एना रॉय

सुश्री एना रॉय ने कहा कि उज्जैन को एक स्वतंत्र और विकसित शहर के रूप में स्थापित करने के लिए शहरी क्षेत्रों का समग्र विकास अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए केवल योजनाएं नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक दृष्टिकोण और ठोस कार्ययोजना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अर्बन प्लानिंग पर गंभीरता से काम करना होगा। उज्जैन के लिए लंबे समय से शोध किया गया है और अब बुनियादी सोच में बदलाव की आवश्यकता है।


उद्योग, पर्यटन और कनेक्टिविटी पर विशेष फोकस

सुश्री रॉय ने कहा कि शहर की प्लानिंग के साथ-साथ उद्योगों की स्थापना, आर्थिक गतिविधियां, स्थानीय नागरिकों की मूलभूत सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने जोर दिया कि उज्जैन में ऐसा माहौल बने कि अन्य क्षेत्रों के लोग यहां आकर बसें और स्थानीय लोगों का पलायन न हो



सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े विकास कार्य

सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट ने बैठक में विभागवार विकास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए—

  • 52 नई सड़कों का निर्माण किया जा रहा है

  • कई पुरानी सड़कों का चौड़ीकरण

  • शिप्रा नदी के समानांतर एमआर-22 सड़क का निर्माण

  • यह सड़क सिंहस्थ बायपास से मेला क्षेत्र को जोड़ेगी

  • मंदिरों और घाटों की आपसी कनेक्टिविटी मजबूत होगी

  • बस और रैपिड ट्रांजिट के रूप में भी उपयोग संभव

इस परिय keeps से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।


घाट, संग्रहालय और पर्यावरण परियोजनाएं

बैठक में 29 किमी नए घाट, कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी परियोजना, वीर भारत संग्रहालय और उज्जैन के पुराने ऐतिहासिक स्मारकों के विकास की जानकारी भी दी गई।


टूरिज्म, मेडिसिटी और आईटी पार्क पर काम


बताया गया कि उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ—

  • मेडिसिटी

  • आईटी पार्क

  • जू (चिड़ियाघर)

  • गीता भवन

के निर्माण की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है।


20 हजार करोड़ का निवेश, नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे

एमपीआईडीसी के श्री राजेश राठौर ने बताया कि उज्जैन जिले में अब तक लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है।
विक्रम उद्योगपुरी में कई उद्योग संचालित हो रहे हैं, जबकि नागदा के पास कचनारिया में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।




एग्रो प्रोसेसिंग, डेयरी और रीसाइक्लिंग पर जोर

सुश्री एना रॉय ने कहा कि उज्जैन में—

  • एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग

  • रीसाइक्लिंग उद्योग

  • डेयरी और कृषि आधारित इकाइयां

विकसित की जाएं। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने उद्योगों में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।


100 एकड़ में टूरिज्म वेलनेस सिटी का प्रस्ताव

बैठक में सुझाव दिया गया कि उज्जैन में 100 एकड़ में टूरिज्म वेलनेस सिटी विकसित की जाए। साथ ही प्रमुख पर्वों और आयोजनों पर आधारित एक वार्षिक पर्यटन कैलेंडर तैयार कर उसका व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि सिंहस्थ 2028 के बाद भी पर्यटकों की संख्या बनी रहे।


स्वास्थ्य, डेयरी और कृषि पर नीति निर्धारण

बैठक में स्वास्थ्य सेवाएं, पशुपालन, डेयरी, उद्यानिकी और कृषि प्रसंस्करण से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। भविष्य में इन क्षेत्रों के विकास के लिए नई नीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।


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