एनएच-52 पर मौत का खेल जारी, प्रशासन मौन
फ्लाईओवर व रोड सेफ्टी की मांग को लेकर युवा किसान संगठन का उग्र धरना
देवास।
एनएच-52 पर लगातार हो रही जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं के विरोध में आज जेल चौराहा, देवास पर युवा किसान संगठन के नेतृत्व में जोरदार और आक्रोशपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष रविंद्र चौधरी ने कहा कि
“एनएच-52 इस क्षेत्र की जीवनरेखा है। इस मार्ग पर 24 घंटे भारी ट्रैफिक चलता है। देवास जिले का लगभग 75 किलोमीटर क्षेत्र इसी राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर गुजरता है, इसके बावजूद जेल चौराहा आज भी ‘मौत का चौराहा’ बना हुआ है।”
उन्होंने बताया कि इस चौराहे पर अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल व अपाहिज हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन अब भी फ्लाईओवर निर्माण और ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर आंख मूंदे बैठा है।
“यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आम जनता की जान से खुला खिलवाड़ है,” उन्होंने कहा।
रविंद्र चौधरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि शहरी क्षेत्र में फ्लाईओवर, सर्विस रोड और स्ट्रीट लाइट अनिवार्य हैं, लेकिन जेल चौराहा इन सभी मानकों का खुला उल्लंघन कर रहा है। इसकी कीमत जनता अपनी जान देकर चुका रही है।
किसानों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि
“किसान खून-पसीने से फसल तैयार करता है, लेकिन रोड डिवाइडर और आवारा पशुओं की समस्या के कारण उसकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। न फसल बच रही है, न मुआवजा मिल रहा है और न ही कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार है।”
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर फ्लाईओवर निर्माण और रोड सेफ्टी को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जेल चौराहा पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
j
धरने के दौरान ज्ञापन का वाचन युवा किसान संगठन के उपाध्यक्ष राजेश पटेल ने किया। आभार प्रदर्शन देवास जिला अध्यक्ष जगदीश पटेल ने किया।
इस उग्र धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। प्रमुख रूप से पालनगर से विक्रम पाटीदार, रवि चौधरी; खेड़ा से राहुल चौधरी; अजनोद-नावदा से मुकेश सरपंच; केलोद से कुंदन चौधरी; लोहार पिपलिया से कैलाश पटेल, भेरूलाल जी सहित सैकड़ों किसान मौके पर मौजूद रहे।
धरने ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या एनएच-52 पर मौत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा, या प्रशासन जागेगा?

Comments
Post a Comment