एक बगिया मां के नाम परियोजना: बड़नगर में हितग्राहियों का प्रशिक्षण, बागवानी से बढ़ेगी आय
एक बगिया मां के नाम परियोजना: बड़नगर में हितग्राहियों को मिला प्रशिक्षण, आत्मनिर्भर बागवानी की ओर बढ़ा कदम
उज्जैन | , 20 दिसम्बर 2025 |
महिलाओं की भागीदारी और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही “एक बगिया मां के नाम” परियोजना के अंतर्गत उज्जैन जिले की जनपद पंचायत बड़नगर में लाभान्वित हितग्राहियों का प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य हितग्राहियों को बागवानी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना रहा।
कार्यशाला में शामिल हितग्राहियों को पौधरोपण की सही विधि, पौधों की सुरक्षा, जल संरक्षण, जलकुंड निर्माण तथा ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के बारे में विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षण के दौरान यह बताया गया कि सीमित संसाधनों में भी किस तरह बगिया विकसित कर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
मनरेगा से जुड़ी है यह महत्वाकांक्षी परियोजना
“एक बगिया मां के नाम” परियोजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
परियोजना के तहत लाभार्थी परिवारों को अपने खेत या घर के पास फलदार पौधों की बगिया विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ती है, बल्कि पोषण स्तर में भी सुधार होता है।
तकनीकी जानकारी और अनुदान की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यानिकी विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। हितग्राहियों को बताया गया कि किस प्रकार वे विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर—
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फलदार पौधों का चयन कर सकते हैं
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पौधों की नियमित देखभाल कर सकते हैं
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सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन प्रणाली अपना सकते हैं
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कम पानी में अधिक उत्पादन ले सकते हैं
इसके साथ ही उद्यानिकी और कृषि विभाग से मिलने वाले अनुदान, तकनीकी सहायता और योजना लाभ की भी विस्तृत जानकारी दी गई।
पौधों की सुरक्षा और जल संरक्षण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान पौधों को रोगों और कीटों से बचाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पौधों की समय पर देखरेख और उचित सुरक्षा से उनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
साथ ही जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जलकुंड निर्माण और वर्षा जल संचयन की उपयोगिता भी समझाई गई। इससे सूखे के समय भी बगिया को सुरक्षित रखा जा सकता है।
अधिकारियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बड़नगर, परियोजना अधिकारी मनरेगा, जिला पंचायत उज्जैन, तथा उद्यानिकी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने सहभागिता की। अधिकारियों ने हितग्राहियों को योजना से जुड़कर लंबे समय तक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका देने का माध्यम है। यदि सही तरीके से बगिया विकसित की जाए, तो आने वाले वर्षों में यह आय का मजबूत स्रोत बन सकती है।
महिलाओं को मिल रहा है नया अवसर
“एक बगिया मां के नाम” परियोजना में महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाएं घर के पास ही बगिया लगाकर फल उत्पादन कर सकती हैं और अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास मानी जा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। बागवानी आधारित आजीविका से किसान और मजदूर दोनों को लाभ होगा।
ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक पहल
“एक बगिया मां के नाम” परियोजना के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण सह कार्यशाला ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे हितग्राही न केवल तकनीकी रूप से सक्षम होंगे, बल्कि अपने भविष्य को लेकर भी आत्मविश्वास महसूस करेंगे।

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