शिव-तत्व की अनुभूति से आत्मजागरण तक—क्यों है महाशिवरात्रि भारतीय संस्कृति का अद्वितीय उत्सव? जब संपूर्ण सृष्टि शिवमय हो उठती है भारतीय संस्कृति में पर्व केवल तिथि नहीं, बल्कि चेतना का उत्सव हैं। महाशिवरात्रि ऐसा ही एक दिव्य पर्व है, जो साधना, संयम, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नयन का संदेश देता है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह महापर्व भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। ‘शिव’ का अर्थ है—कल्याणकारी। ‘रात्रि’ का अर्थ है—अज्ञान का अंधकार। महाशिवरात्रि वह रात्रि है, जब साधक अज्ञान से ज्ञान की ओर, अशांति से शांति की ओर और सीमित चेतना से असीम चेतना की ओर अग्रसर होता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों का नाम नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और आंतरिक शुद्धि का भी नाम है। पौराणिक आधार: कथाओं में छिपा जीवन-दर्शन महाशिवरात्रि से जुड़ी अनेक कथाएं हमारे ग्रंथों में वर्णित हैं, जो केवल आस्था नहीं, बल्कि गहन जीवन-दर्शन प्रस्तुत करती हैं। 1. शिव-पार्वती विवाह: संतुलन का प्रतीक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिव सं...
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