ऐरी सखी मंगल गाओ री… मां शिप्रा तट पर सामूहिक विवाह में 22 जोड़े वैदिक विधि से बंधे

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुपुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव ने भी परिणय सूत्र में बंधकर आशीर्वाद प्राप्त किया

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, संत समाज और योगगुरु बाबा रामदेव सहित अनेक गणमान्यों की उपस्थिति


उज्जैन : रविवार, 30 नवम्बर 2025

पावन मां शिप्रा तट पर रविवार को आयोजित भव्य सामूहिक विवाह समारोह में संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। विवाह मंडप में गूँजते “ऐरी सखी मंगल गाओ री…” के बीच 22 जोड़े पूर्ण वैदिक विधि और मंत्रोच्चार के साथ विवाह सूत्र में बंधे।

इस ऐतिहासिक आयोजन का विशेष आकर्षण रहा—मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुपुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव का भी इसी मंच पर वैदिक विधि से विवाह संस्कार सम्पन्न होना। कार्यक्रम में उपस्थित हजारों लोगों और संत समाज ने नवदंपत्ति को आशीर्वाद प्रदान किया।


महाकाल की नगरी बनी भव्य विवाह का साक्षी



समारोह में प्रदेश के कोने–कोने से आए नवदंपत्तियों के साथ मुख्यमंत्री परिवार का विवाह संस्कार संपन्न होना सामाजिक सौहार्द का अनोखा उदाहरण रहा।
विवाह स्थल को शिप्रा तट की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि के अनुरूप फूलों, दीयों और पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया गया था।

वैदिक पंडितों के मंत्रोच्चार, कन्यादान की विधि, सप्तपदी और अग्नि की परिक्रमा के बीच पूरा परिसर धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में रंगा दिखाई दिया।


राज्यपाल से लेकर संत समाज तक, सभी गणमान्य उपस्थित



कार्यक्रम का वैभव इस बात से और बढ़ गया कि कई राष्ट्रीय और धार्मिक स्तर की प्रमुख हस्तियाँ इस अवसर की साक्षी बनीं। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—

  • राज्यपाल

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

  • मंत्रीगण व जनप्रतिनिधि

  • योगगुरु बाबा रामदेव

  • बागेश्वर पीठाधीश श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

  • संत समाज और अनेक गणमान्य अतिथि

संतों ने सामूहिक विवाह को समाज को जोड़ने वाला पुनीत कार्य बताते हुए नवविवाहितों के मंगल भविष्य की कामना की।


सामाजिक समरसता और संस्कारों का अद्भुत संगम



सामूहिक विवाह कार्यक्रम का उद्देश्य निर्धन, असहाय और सामान्य परिवारों की बेटियों का सम्मान के साथ विवाह कराना था।
सरकार और सामाजिक संस्थाओं की पहल से
22 कन्याओं के विवाह एक ही मंच पर, एक ही परंपरा में, समान सम्मान के साथ सम्पन्न कराए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि—

“सामूहिक विवाह परंपरा समाज को एकता, सहयोग और संस्कारों की ओर प्रेरित करती है। शिप्रा तट पर यह आयोजन हमारी संस्कृति की आत्मा का प्रतीक है।”


वैदिक विवाह विधि का दिव्य दृश्य

पूरे आयोजन में निम्न प्रमुख संस्कार संपन्न हुए—

  • वर–वधू की परिचय परंपरा

  • कन्यादान विधि

  • जयमाला समारोह

  • सप्तपदी—सात वचन

  • अग्नि के फेरे

  • आशीर्वाद समारोह

हर जोड़े को वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक सामग्री व उपहार भी प्रदान किए गए।


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